हर तरफ बस एक ही खबर है अन्ना हजारे का आमरण अनशन, आमरण अनशन का कारण है जन लोक पाल विधेयक पारित कराना , इस विधेयक को पारित कराने के पीछे सबकी सोच है की इससे भ्रस्टाचार ख़तम हो जाएगा, अच्छी बात है भ्रस्टाचार ख़तम होना ही चाहिए तभी इस देश की तरक्की हो सकती है, लेकिन
किया सचमुछ इस विधेयक के पारित होने से जो सिस्टम बनेगा वो भ्रस्टाचार को ख़तम कर पायेगा?
ये सवाल आज की राजनीति पर उठने वाला सबसे बड़ा सवाल है क्योकि आज भी इस देश में ऐसे कई डिपार्टमेंट है जो विभिन्न प्रकार के भ्रस्टाचार के खिलाफ कार्यवाई करने का अधिकार रखते है, लेकिन भ्रस्टाचार ख़तम नहीं हो पा रहा है, इसकी वजह है की ये सब डिपार्टमेंट खुद भ्रस्टाचार में लिप्त है, इन सब बातो को देख कर हम ये कह सकते है कि सिस्टम तो मौजूद है लेकिन किसी एक ठोस क़ानून की कमी है जिसके जरिये भ्रस्ट अधिकारियों को सजा दी जा सके और भ्रस्टाचार पर लगाम कसी जा सके,
ये बात अन्ना हजारे जैसे विद्वान बखूबी जानते है, लेकिन फिर भी लोक पाल विधेयक के लिए अनशन बात कुछ हजम नहीं होती,
किया लोकपाल विधेयक ही एकमात्र चारा है?
अगर हां तो इसकी गारंटी कौन लेगा की लोक पाल सिस्टम खुद भ्रष्टाचार से बचकर इमानदारी से भ्रस्टाचार रोकने का कार्य करेगा, कोन लेगा इसकी गारंटी?
क्या अन्ना हजारे?
या बाबा रामदेव और स्वामी अग्निवेश जैसे उनके सहयोगी जिनपर पहले से ही भ्रष्टाचार या अन्य आरोप लग रहे है, बेशक जन लोकपाल सिस्टम से भ्रस्ताचार ख़तम होने की कोई गारंटी नहीं,
अब देखने वाली बात ये है की जन लोकपाल सिस्टम के पक्ष में कौन है और विपक्ष में कौन है,
सरकार--------------- विपक्ष में नहीं
विपक्षी दल---------- विपक्ष में नहीं
अन्य दल------------ पक्ष में
न्याय पालिका------- विपक्ष में नहीं
कार्य पालिका-------- विपक्ष में नहीं
प्रशाशन------------- विपक्ष में नहीं
जनता -------------- पक्ष में
अब यहाँ देखने वाली बात ये है कि जनता तो अपने लाभ और भ्रस्टाचार को ख़तम करने के लिये अन्ना हजारे और इस जन लोकपाल सिस्टम का समर्थन कर रही है,
लेकिन सरकार, विपक्षी दल, अन्य दल, न्याय पालिका, कार्य पालिका और प्रशाशन जो कि भ्रस्टाचार में लिप्त है अगर उन्हें इस सिस्टम से हानि हो सकती है या उनपर इस सिस्टम से लगाम लग सकती है तो ये इसके विरौथ में क्यों नहीं, शायद वे सब इस सिस्टम कि सच्चाई को जानते है,
कही सच्चाई ये तो नहीं कि इस सिस्टम से भ्रस्ट लोगो के लिये पदों कि संख्या और बढ़ सकती है, और लोकपाल का पद मिलने के बाद भ्रस्टाचार के नए अवसर प्राप्त हो सकते है, इस सिस्टम को लेकर सम्भावनाये बहुत है, इस सिस्टम से देश का भला हो न हो लेकिन इन पदों पर पहुच कर कुछ लोगो का भला जरूर हो सकता है,
अब जब किसी का भला होने ही वाला है तो विरोध कैसा?
तो आइये हम सब मिलकर एकाग्र चित होकर अन्ना हजारे जी का समर्थन करे और इस सिस्टम को बनवाने में उनका सहयोग करे, और देश को एक नयी दिशा में ले जाने में उनका साथ दे,,,,,,,
"नसीम निगार हिंद"

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