Monday, 7 November 2011

"तुम करो तो धर्म और हम करे तो हिंसा"




NOTE- ( जीवो  को  मारना  , मांस  मछली  खाना  , हर  धरम  में  किसी  न  किसी  रूप  में  पाया  जाता  है ,
मै  ये  लेख  लिख  रहा  हु  क्योकि  नफरत  फैलाने  वालो  और  इस्लाम  को  बदनाम  करने  वालो  की  सच्चाई  सबके  सामने  आनी  चाहिए , )

आज  eid-u-l azha के  दिन  मेने  FB पर  जगह -जगह  मुसलमानों  की  अकीदत  से  खिलवाड़  करने  वाले  पोस्ट  देखे ,,,

कुछ  अज्ञानी  लोग  अपनी  तुच्छ  राजनीति  के  तहत  इस  त्यौहार  के  बारे  में  लिख -लिख  कर  जानवरों  को  काटने  की  घटना  बता  बता  कर , जानवरों  पर  रहम  करने  की  दुहाई  दे -दे  कर , मुसलमानों  और  इस्लाम  को  बदनाम  करना  और  हिंसात्मक  बताना  चाहते  है ,

इन  लोगो  की  मंशा  सिर्फ  और  सिर्फ  ये  है  की  लोगो  के  दिलो  में  इस्लाम  के  लिए  नफरत  पैदा  की  जाए , जिसके  चलते  सभी  जातीय  इस्लाम  के  सर्वश्रेष्ट  धरम  होने  के  बाद  भी  मुसलमान  न  हो ,

ऐसी  मनसा  रखने  वाले  ये  वे  लोग  है  जो  गाय  हत्या  को  पाप  कहते है , क्योकि  इस  धरम  के  मुताबिक  गाय  की  ह्त्या  करना  पाप  है ,
लेकिन  ये  बात  किया  सिर्फ  गाय  तक  सिमित  है , क्योकि  इस  त्यौहार  में  गाय  की  कम  बल्कि  बकरों , भेंसो  और  ऊँटो  की  कुर्बानी  जियादा  तादाद  में  की  जाती  है ,
अगर  जीवो  पर  दया  का  ये  नाटक  सिर्फ  गाय  तक  सिमित  नहीं  तो  काली  के  मंदिरों  में  दी  जाने  वाली  बलि  किस  धरम  का  हिस्सा  है , अब  यहाँ  पर  कुच्छ  लोग  ये  कहकर  धार्मिक  सफाई  दे  सकते  है  की  ये  बलि  प्रथा  कर्मकांड  और  आडम्बरो  की  देन  है  सनातन -आर्य  धरम  का  हिस्सा  नहीं , 

यहाँ  पर  मै  सनातन-आर्य  धरम  के  तीन  पूज्य  देवताओं  में  से  एक  भगवान्  शंकर  की  वो  घटना  याद  दिलाना  चाहुगा  जिसमे  वे  अपनी  नहाती  हुई  पत्नी  से  मिलने  की  कोशिश  करते  है  और  उनका  पुत्र  गणेश  उन्हें  वह  जाने  से  रोकता  है  क्योकि  गणेश  की  माँ  ने  उसे  ऐसा  कहा  था  इस  पर  शंकर  भगवान  घुस्सा  हो  जाते  है  और  गणेश  का  सर  काट  देते  है , तब  पार्वती  रोष -विलाप  करती  है  और  अपने  पुत्र  को  फिरसे  जिंदा  करने  की  जिद  करती  है , अब  शंकर  एक  हाथी  के  बच्चे  का  सर  काट  कर  गणेश  को  जिंदा  करते  है ,
अब  जरा  गौर  कीजिये  यहाँ  भी  एक  हत्या  हुई  है  लेकिन  नाही  ये  कोई  अधर्म  है  ना  कोई  पाप , और  नाही  कोई  हिंसा ,

मै  आप  सभी  को  एक  दूसरी  घटना  और  याद  दिलाना  चाहुगा  ,

क्या  आप  जानते  है  की  जिस  वक़्त  सीता  को  रावन  उठा  कर  ले  गया  उस  वक़्त  राम  कहा  थे ?
आप  सबको  ये  जानकार  हैरानी  होगी  की  मर्यादा  पुरुषोत्तम  श्री  राम  उस  वक़्त  एक  हिरन  का  शिकार  करने  गए  थे ,
ये  एक  बहुत  बड़ी  सच्चाई  है  जिससे  मै  आप  सब  को  रूबरू  कराना  चाहता  हु , जी हा  वो  सच्चाई  जो  चीख -चीख  कर  कहती  है  की  जीव  हत्या  सनातन -आर्य  धरम  में  भी  मौजूद  थी ,
लेकिन  आज  के  दौर  में  सिर्फ  और  सिर्फ  मुसलमानों  और  इस्लाम  को  बदनाम  करने  के  लिए  इन  बातो  को  उछाला  जाता  है ,
ये  सब  एक  घिनोनी  राजनीति  का  हिस्सा  है  जो  सिर्फ  और  सिर्फ  मुसलमानों  के  खिलाफ  तैयार  की  गई  है , इसी  राजनीति  के  तहत  गाय  हत्या  के  आरोप  में  सिर्फ  मुसलमानों  को  सजा  दी  जाती  है , लेकिन  गाय  हत्या  करता  कौन  है ,
आइये  गौर  करे ,,,,
गाय  हत्या  का  मुख्य  कारण  है, गाय  के  मांश  का  बेचा  जाना , गाय  के  हत्यारे  को  सामने  लाने  के  लिए  सबसे  बड़ा  और  अहम्  सवाल  यही  है  की ,,,
गाय  का  मांश  बेचता  कौन  है ?
हा  हा  हा  इस  सवाल  पर  तो  सब  लोग  मुह  उठाकर  यही  जवाब  देगे  की  कसाई  बेचता  है , क्योकि  कसाई  मुस्लमान  जो  ठेहरा  , इससे  अच्छा  मौका  और  कब  मिलेगा  मुसलमानों  को  बदनाम  करने  का ,
लेकिन  सिर्फ  कसाई  पर  ये  इलज़ाम  लगाना  सरासर  गलत  और  अनैतिक  है , क्योकि  ये  गाये  कसाई  के  घर  में  पैदा  नहीं  होती ,
अगर  कसाई  के  घर  में  पैदा  नहीं  होती  तो  कहा  पैदा  होती  और  पाली  जाती  है?
जी  हां  ये  भी  एक  बहुत  बड़ा  सच्च  है  की  ये  जियादातर  उन्ही  लोगो  के  घर  पैदा  होती  और  पाली  जाती  है , जो  गाय  हत्या  को  पाप  और  अपराध बताते है , 
अब  सवाल  उठता है  की  ऐसे  लोगो  के  घर  से  ये  गाय  कसाई  जैसे  कुवे  में  केसे  पहुच  जाती  है , ये  लोग  कसाई  जैसे  कुवे  में  अपनी  माँ  को  क्यों  फैंक  देते  है  और  कसाई  किस  आधार  पर  गाय  को  लेता  है , ये  लोग  गाय  के  मांस  के  आधार  पर  पैसा  मांगते  है , और  कसाई  भी  मांस  के  आधार  पर  ही  पैसा  देता  है ,,,
छोटे  जानवर  का  कम  पैसा  बड़े  जानवर  का  ज्यादा  पैसा ,,,
अब  ये  बात  साबित  होती  है  की  ये  लोग  भी  कसाई  को  मांस  ही  बेचते  है , फर्क  बस  इतना  है  ये  जिंदा  बैचते  है  और  कसाई  मरा  हुवा,
अगर  सच्चाई यही है तो  फिर  अकेला  कसाई  अपराधी  क्यों ?
हकीकत  मै  अपराधी   मौत  का  कुवा  नामक  कसाई  है  या  वो  सनातन -आर्य  जो  अपनी  माँ  यानी  गाय  को  चन्द  पैसो  के  लिए  उस  मौत  के  कुवे  में  फैंक  देता  है ?
बेशक  अपराधी  कुवा  नहीं  हो  सकता,,,,,
तो फिर कुवे को सजा क्यों???
वाह  रे  मेरे  देश  के  अंधे  कानून  कभी  तो  सच्चाई  को  देख , जरा  देख  गाय  की  हत्या  का  अपराधी  कौन  है , कभी  तो  अपराधी  को  सजा  दे,,,,,,,,

11 comments:

  1. इस या उस धर्म की बात नहीं, न हिंसा अहिंसा की कोई बात है जो भी बेगुनाह, बेजुबान जानवरों को मारता है वह इंसानियत के खिलाफ है और दंड के लायक है |

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  2. main gujarat se hu baroda dist main ek jagha hai jis ka naam cehla wada hai jaha par lagh bagh saal ke 364 days hindu log murga bakra. ki bali chada te hai aur yaha jis tarha se bali chada ye jate hai wo baya nahi ho sak ta aur khoon piya jata hai janworo ka

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  3. aur agar yhe baat hai ki jo jiw hatiya karey to fir baghawaan ram aur sankar ji ko aap kay kaho ge wo bhi insaniyat ke kehlaaf hai fir to

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  4. ‎Naseem Bhai , aapki baat se sahmat hu. Main abhi jharkhand ke Ramgarh men hu aur yahan Maa Chhinnmastika ka mandir hai , jise Rajrappa Mandir kahte hain . Is mandir men roj bali ke naam par 150 se jyada bakre katate hain aur ye sab Musalmaanon dwara nahin kiya jata hai.

    Janwar chaahe chhota ho ya bada. Agar koi chhota jaanwar kha sakta hai to wah bada bhi kha sakta hai ...

    Durga Pooja me bhi bali dene ki parampara rahi hai .....

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  5. activity depend on us..what we do....all religion have good and bad part....being human we can realize what the real face....so first we should follow humanity....

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  6. .............
    दुनिया जब से बनी नफरत फेलाने वाले अपना काम करते हैं ,
    लेकिन धर्मानुसार किये गए कार्य हिंसा नहीं कुर्बानी संज्ञा देती हैं !!!

    .............
    अघौरी-साधू मदिरा और पशु के बलि संभव नहीं !
    काली-माता से वरदान प्राप्त करने वध अवश्य !
    आदिवासी [भारत के वंशज] बिना मदिरा-माँस के कुछ भी नहीं !
    .............
    भारतीय-फौजें या एन.सी.सी. केम्प में माँस प्रचलित कियूं सिर्फ
    २-३ प्रदेशों के निवासी माँस-मछली नहीं शुद्ध-शाकाहारी यह उनका
    व्यक्तिगत मत हैं कियुनकी शास्त्रों में माँस का उपयौग बताया गया ,
    परन्तु कुछ उच्य जाती बताने के कारण दूसरों को हिंसक बताते हैं
    जबकि छुप-छुप कर वोह भी खाते हैं ....
    ..............
    मैं तो सिर्फ इतना ही कहूँगा मैं मांसाहारी भ्रष्टाचारी से भला :
    मोहम्मद तारिक.इन्किलाब-जिंदाबाद,जय-हिंद,जय-भारत

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  7. very good.......bahut accha likha hey.

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  8. कुर्बानी का मतलब होता है स्वयं कुछ कुर्बान करना। यानी हरेक मुस्लिम कम से कम अपनी एक उंगली का आधा-आधा हिस्सा ही कुर्बान करें तो कैसा रहे? बेचारे बकरों ने क्या बिगाड़ा है,कितनी अच्छी बात है कि आज हिंदू धर्म से बलि प्रथा लगभग लोप हो चुकी है और अपवाद स्वरूप सिर्फ़ इक्का-दुक्का जगहों पर ही यह बकवास परंपरा जारी है....काश मुस्लिम भी इस क़ुरबानी की प्रथा से तोबा कर ले तो इन बेजुबान जानवरों को कतल न

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