सनातन धरम में वेदों को सदा से ही ज्ञान (इल्म) का भण्डार (जखीरा) बताया जाता है , और एक हकीकत ये है कि ज्ञान ( इल्म) को जितना बाटो , जितना लुटाओ , जितना खर्च करो उतना बढ़ता है , लेकिन इसके ठीक विपरीत (उल्टा) सनातन-आर्यों ने वेदों को हमेशा दूसरी जातियों और शुद्रो से छुपाया है ,,, इतना ही नहीं कहा जाता है कि अगर शुद्र वेदों को पढ़ लेते या कही सुन भी लेते तो उसे इसकी सजा दी जाती थी ,,,
:- सनातन-आर्यों कि इस खोखली मानसिकता के ये मुख्य कारण (वजह ) हो सकते है ,,,
1:- धर्म पर अपना अधिकार बनाये रखना , शुद्रो और अन्य जातियों को अपने मुकाबले समानता न आने देना ,,,
2:- खुद को समाज का उच्च वर्ग बना कर शुद्रो का शोषण करना !!!
3:- वेदों में दिए हुए उन मंत्रो को छुपाना जिनको पढने से मरने के बाद इंसान को स्वर्ग का मिलना बताया जाता है !!!
4:- दुनिया के सभी सुखो पर अपना अधिकार (हक ) ज़माना , और मरने के बाद स्वर्ग को भी अपने अधिकार में कर लेना !!!
ये सभी कारण इस्लाम से पहले कि कहानी बयान करते है , इस्लाम के आजाने के बाद एक वजह और जुड़ जाती है
5:- वेदों में आये उन श्लोको को छुपाना जो इस्लाम कि सच्चाई बयान करते है !!!
6:- इस्लाम कि सच्चाई बयान करने वाले श्लोको को छुपाकर , मुसलमानों कि ताक़त ना बढ़ने देने के लिए शुद्रो को उन्ही के मान्यता वाले किसी अन्य धरम कि तरफ मोड़ना !!!
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आइये अब जरा तफसील से देखते है इन कारणों में कितनी सच्चाई है ,,,,,
1:- धर्म पर अपना अधिकार बनाये रखना , शुद्रो और अन्य जातियों को अपने मुकाबले समानता ना आने देना !!!
explain:- ये बात 100% सच्च कि सनातन-आर्यों ने इस धरम पर हमेशा सिर्फ और सिर्फ अपना अधिकार बनाये रख्खा , शुद्रो को अछूत बता कर कभी अपने पास भी नहीं आने दिया , यहाँ तक कि अपने मंदिरों और बाकी धार्मिक स्थानों पर भी शुद्रो के जाने पर उन्हें असामाजिक सजा दी , शुद्रो को प्रताड़ित (सताया) किया , बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर के आने तक यही सिलसिला चलता रहा
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2:- खुद को समाज का उच्च वर्ग बना कर शुद्रो का शोषण करना !!!
explain:-इस बात का इतिहास गवाह है कि सनातन-आर्यों ने सदा से ही खुद को उच्च जाती का और शुद्रो को नीची जाती का घोषित कर रख्खा था , हद तो ये थी कि ये शुद्रो को अछूत कहते और उनके साथ ऐसा व्यवहार करते जो इंसानियत को भी शर्मसार करदे , इनके इसी बर्ताव के चलते शुद्रो का जीवन स्वर्ग जैसे इस देश में रह कर भी नरक से बदतर बना रहा ,
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3:- वेदों में दिए हुए उन मंत्रो को छुपाना जिनको पढने से मरने के बाद इंसान को स्वर्ग का मिलना बताया जाता है !!!
explain:- यजुर्वेद के खंड 20 में एक मंत्र आया है जो इस प्रकार है ,,,
ला इलाह हर्देह पापम,
इल्लल्लाह परम पिरम,
जा त्वम् इच्छाम स्वर्गम,
नामः जपम मुहम्मादम,
अनकही के नाम से विख्यात इस श्लोक के बारे में कहा जाता है कि इसे पढकर मरने वाले इंसान को स्वर्ग कि प्राप्ति होती है , अब मै उसी मसले पर आता हु कि अगर इससे किसी को सुवर्ग मिलता है तो फिर इसे छुपाने कि किया ज़रूरत है , इस श्लोक को छुपाने का ये एक ऐसा कारण है जो इंसानी फितरत और धार्मिक आस्था से जुदा है , सनातन -आर्यों ने शुद्रो को इस दुनिया में कभी अपनी बराबरी का नहीं बन्ने दिया उनकी ज़िन्दगी को हमेशा नरक से बदतर बनाये रख्खा , शुद्रो से इस हद तक नफरत करने वाले लोग शायद ये नहीं चाहते थे कि मरने के बाद यही शुद्र इनके सामान स्वर्ग के भागीदार बन जाए ,,,
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4:- दुनिया के सभी सुखो पर अपना अधिकार (हक) ज़माना , और मरने के बाद स्वर्ग को भी अपने अधिकार में कर लेना !!!
explain:- दुनिया में तो इन्होने खुदको सर्वोच्च बताकर समस्त सुखो पर अपना अधिकार जमा ही रख्खा था , इसके आगे इनकी मंशा मरने के बाद सुवर्ग पर भी एकाधिकार करने कि रही , इसलिए शुद्रो के वेदों को पढने , यहाँ तक कि सुनने पर भी रोक लगाई गई , इसके चलते अगर कोई शुद्र वेदों को पढ़ या कही सुन भी लेता तो उसे सजा दी जाती ,,, अनकही के नाम से विख्यात इस श्लोक के बारे में कहा जाता है कि इसे पढकर मरने वाला इंसान सीधा स्वर्ग जाता है , अब मै यहाँ फिर वही बात कहना चाहुगा हु कि अगर इससे किसी को स्वर्ग मिलता है तो फिर इसे छुपाने कि किया ज़रूरत है , क्योकि सनातन-आर्यों ने शुद्रो को इस दुनिया में कभी अपनी बराबरी का नहीं बन्ने दिया उनकी ज़िन्दगी को हमेशा नरक से बदतर बनाये रख्खा , इसलिए शुद्रो से इस हद तक नफरत करने वाले लोग शायद ये नहीं चाहते थे कि मरने के बाद यही शुद्र इनके सामान स्वर्ग के भागीदार बन जाए ,,,
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5:- वेदों में आये उन श्लोको को छुपाना जो इस्लाम कि सच्चाई बयान करते है !!!
explain:- यजुर्वेद के खंड 20 में आये अनकही कहे जाने वाले इस श्लोक को पढने से पता चलता है कि ये इस्लाम के कलमे का पुराना रूप है और ये इस्लाम कि सच्चाई बयान करता है , ये देखिये ,,,
ला इलाह हर्देह पापम,
इल्लल्लाह परम पिरम,
जा त्वम् इच्छाम स्वर्गम,
नामः जपम मुहम्मादम,
इस प्रकार हम कह सकते है कि वेदों में भी ऐसे सबूत मौजूद है जो इस्लाम कि सच्चाई को बयान करते है , इन सबूतों को देख कर समस्त शुद्र जातीया मुसलमान हो सकती थी , और ये सब इन्हें गवारा नहीं था बस इसी जलन में इस्लाम के फैलने के बावजूद भी इन्होने वेदों को शुद्रो से बचाया ,,,
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6:- इस्लाम कि सच्चाई बयान करने वाले श्लोको को छुपाकर , मुसलमानों कि ताक़त ना बढ़ने देने के लिए शुद्रो को उन्ही के मान्यता वाले किसी अन्य धरम कि तरफ मोड़ना !!!
explain:- बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर के उदय के बाद तमाम शुद्र बाबा साहेब के समर्थक और आज्ञाकारी बन गए , बाबा साहेब ये अच्छी तरह जान चुके थे कि शुद्र जब तक शुद्र बने रहेगे उनका उत्थान नहीं हो सकता , शुद्रो से शुद्र और अछूत नाम का कलंक हटाने के लिए बाबा साहेब ने एक नए धरम कि खोज शुरू करदी इधर सनातन -आर्यों कि धरकने बढ़ गयी क्योकि लोकतंत्र में अपना राज कायम करने के लिए और मुसलमानों का सत्ता से सफाया करने के लिए उन्हें शुद्रो कि घोर आवश्यकता थी , उन्होंने उनसे हमदर्दी जताई भाईचारा दिखाया , गले भी लगाया लेकिन बाबा साहेब जैसे विद्वान् से उनकी मानसिकता कैसे छुप सकती थी , वे अपने लिए नए धरम कि खोज पर अडिग रहे उनके सामने कई विकल्प थे जिनमे से सबसे बड़े विकल्प इस्लाम और इसाई धरम थे लेकिन इन दोनों ही धर्मो में से किसी को अपनाने पर शुद्र सनातन-आर्यों कि विचारधारा से अलग हो जाते , ऐसा होने पर सनातन-आर्यों को उनका राजनैतिक लाभ भी नहीं मिलसकता था , और अगर by luck शुद्र मुस्लमान होजाते तो इनका राज करने का सपना सपना ही रह जाता , इसलिए बाबा साहेब से इस्लाम और इसाई धरम कि बुराइया ही कि गयी , अब यहाँ एक मसला और है कि अगर सनातन-आर्य धरम एक सम्पूर्ण धरम है तो उसकी अच्छाईया बताकर बाबा साहेब और तमाम शुद्रो को सनातन-आर्य धरम में कियो नहीं लेलिया गया बाबा साहेब और तमाम शुद्रो को पंडित या ब्रह्मण कियो नहीं बना लिया गया ,,,
सनातन-आर्यों कि इस मानसिकता को जान्ने के लिए मै बताना चाहुगा कि सनातन-आर्यों ने बाबा साहेब को सनातन धरम को अपनाने या वेदों को अपनाने का प्रस्ताव नहीं दिया , इसकी दो वजह हो सकती है
1- उनकी मानसिकता अब भी वही थी और वे अपने धरम को अछूतों से बचाना चाहते थे,
2- वेदों में इस्लाम कि सच्चाई के सबूत मौजूद है कही शुद्र उन्हें देख कर मुसलमान ना होजाए ,
क्योकि लोकतंत्र में राजशाही ताकत पे नहीं जनसँख्या पर आधारित है , इसी लिए बाबा साहेब को उन्ही कि विचार-धारा वाले धरम कि और मोड़ा गया ताकि सनातन-आर्य बहुसंख्यक हो जाए और उन्हें ही हमेशा सत्ता प्राप्त हो ,,,,,,,,
:- सनातन-आर्यों कि इस खोखली मानसिकता के ये मुख्य कारण (वजह ) हो सकते है ,,,
1:- धर्म पर अपना अधिकार बनाये रखना , शुद्रो और अन्य जातियों को अपने मुकाबले समानता न आने देना ,,,
2:- खुद को समाज का उच्च वर्ग बना कर शुद्रो का शोषण करना !!!
3:- वेदों में दिए हुए उन मंत्रो को छुपाना जिनको पढने से मरने के बाद इंसान को स्वर्ग का मिलना बताया जाता है !!!
4:- दुनिया के सभी सुखो पर अपना अधिकार (हक ) ज़माना , और मरने के बाद स्वर्ग को भी अपने अधिकार में कर लेना !!!
ये सभी कारण इस्लाम से पहले कि कहानी बयान करते है , इस्लाम के आजाने के बाद एक वजह और जुड़ जाती है
5:- वेदों में आये उन श्लोको को छुपाना जो इस्लाम कि सच्चाई बयान करते है !!!
6:- इस्लाम कि सच्चाई बयान करने वाले श्लोको को छुपाकर , मुसलमानों कि ताक़त ना बढ़ने देने के लिए शुद्रो को उन्ही के मान्यता वाले किसी अन्य धरम कि तरफ मोड़ना !!!
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आइये अब जरा तफसील से देखते है इन कारणों में कितनी सच्चाई है ,,,,,
1:- धर्म पर अपना अधिकार बनाये रखना , शुद्रो और अन्य जातियों को अपने मुकाबले समानता ना आने देना !!!
explain:- ये बात 100% सच्च कि सनातन-आर्यों ने इस धरम पर हमेशा सिर्फ और सिर्फ अपना अधिकार बनाये रख्खा , शुद्रो को अछूत बता कर कभी अपने पास भी नहीं आने दिया , यहाँ तक कि अपने मंदिरों और बाकी धार्मिक स्थानों पर भी शुद्रो के जाने पर उन्हें असामाजिक सजा दी , शुद्रो को प्रताड़ित (सताया) किया , बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर के आने तक यही सिलसिला चलता रहा
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2:- खुद को समाज का उच्च वर्ग बना कर शुद्रो का शोषण करना !!!
explain:-इस बात का इतिहास गवाह है कि सनातन-आर्यों ने सदा से ही खुद को उच्च जाती का और शुद्रो को नीची जाती का घोषित कर रख्खा था , हद तो ये थी कि ये शुद्रो को अछूत कहते और उनके साथ ऐसा व्यवहार करते जो इंसानियत को भी शर्मसार करदे , इनके इसी बर्ताव के चलते शुद्रो का जीवन स्वर्ग जैसे इस देश में रह कर भी नरक से बदतर बना रहा ,
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3:- वेदों में दिए हुए उन मंत्रो को छुपाना जिनको पढने से मरने के बाद इंसान को स्वर्ग का मिलना बताया जाता है !!!
explain:- यजुर्वेद के खंड 20 में एक मंत्र आया है जो इस प्रकार है ,,,
ला इलाह हर्देह पापम,
इल्लल्लाह परम पिरम,
जा त्वम् इच्छाम स्वर्गम,
नामः जपम मुहम्मादम,
अनकही के नाम से विख्यात इस श्लोक के बारे में कहा जाता है कि इसे पढकर मरने वाले इंसान को स्वर्ग कि प्राप्ति होती है , अब मै उसी मसले पर आता हु कि अगर इससे किसी को सुवर्ग मिलता है तो फिर इसे छुपाने कि किया ज़रूरत है , इस श्लोक को छुपाने का ये एक ऐसा कारण है जो इंसानी फितरत और धार्मिक आस्था से जुदा है , सनातन -आर्यों ने शुद्रो को इस दुनिया में कभी अपनी बराबरी का नहीं बन्ने दिया उनकी ज़िन्दगी को हमेशा नरक से बदतर बनाये रख्खा , शुद्रो से इस हद तक नफरत करने वाले लोग शायद ये नहीं चाहते थे कि मरने के बाद यही शुद्र इनके सामान स्वर्ग के भागीदार बन जाए ,,,
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4:- दुनिया के सभी सुखो पर अपना अधिकार (हक) ज़माना , और मरने के बाद स्वर्ग को भी अपने अधिकार में कर लेना !!!
explain:- दुनिया में तो इन्होने खुदको सर्वोच्च बताकर समस्त सुखो पर अपना अधिकार जमा ही रख्खा था , इसके आगे इनकी मंशा मरने के बाद सुवर्ग पर भी एकाधिकार करने कि रही , इसलिए शुद्रो के वेदों को पढने , यहाँ तक कि सुनने पर भी रोक लगाई गई , इसके चलते अगर कोई शुद्र वेदों को पढ़ या कही सुन भी लेता तो उसे सजा दी जाती ,,, अनकही के नाम से विख्यात इस श्लोक के बारे में कहा जाता है कि इसे पढकर मरने वाला इंसान सीधा स्वर्ग जाता है , अब मै यहाँ फिर वही बात कहना चाहुगा हु कि अगर इससे किसी को स्वर्ग मिलता है तो फिर इसे छुपाने कि किया ज़रूरत है , क्योकि सनातन-आर्यों ने शुद्रो को इस दुनिया में कभी अपनी बराबरी का नहीं बन्ने दिया उनकी ज़िन्दगी को हमेशा नरक से बदतर बनाये रख्खा , इसलिए शुद्रो से इस हद तक नफरत करने वाले लोग शायद ये नहीं चाहते थे कि मरने के बाद यही शुद्र इनके सामान स्वर्ग के भागीदार बन जाए ,,,
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5:- वेदों में आये उन श्लोको को छुपाना जो इस्लाम कि सच्चाई बयान करते है !!!
explain:- यजुर्वेद के खंड 20 में आये अनकही कहे जाने वाले इस श्लोक को पढने से पता चलता है कि ये इस्लाम के कलमे का पुराना रूप है और ये इस्लाम कि सच्चाई बयान करता है , ये देखिये ,,,
ला इलाह हर्देह पापम,
इल्लल्लाह परम पिरम,
जा त्वम् इच्छाम स्वर्गम,
नामः जपम मुहम्मादम,
इस प्रकार हम कह सकते है कि वेदों में भी ऐसे सबूत मौजूद है जो इस्लाम कि सच्चाई को बयान करते है , इन सबूतों को देख कर समस्त शुद्र जातीया मुसलमान हो सकती थी , और ये सब इन्हें गवारा नहीं था बस इसी जलन में इस्लाम के फैलने के बावजूद भी इन्होने वेदों को शुद्रो से बचाया ,,,
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6:- इस्लाम कि सच्चाई बयान करने वाले श्लोको को छुपाकर , मुसलमानों कि ताक़त ना बढ़ने देने के लिए शुद्रो को उन्ही के मान्यता वाले किसी अन्य धरम कि तरफ मोड़ना !!!
explain:- बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर के उदय के बाद तमाम शुद्र बाबा साहेब के समर्थक और आज्ञाकारी बन गए , बाबा साहेब ये अच्छी तरह जान चुके थे कि शुद्र जब तक शुद्र बने रहेगे उनका उत्थान नहीं हो सकता , शुद्रो से शुद्र और अछूत नाम का कलंक हटाने के लिए बाबा साहेब ने एक नए धरम कि खोज शुरू करदी इधर सनातन -आर्यों कि धरकने बढ़ गयी क्योकि लोकतंत्र में अपना राज कायम करने के लिए और मुसलमानों का सत्ता से सफाया करने के लिए उन्हें शुद्रो कि घोर आवश्यकता थी , उन्होंने उनसे हमदर्दी जताई भाईचारा दिखाया , गले भी लगाया लेकिन बाबा साहेब जैसे विद्वान् से उनकी मानसिकता कैसे छुप सकती थी , वे अपने लिए नए धरम कि खोज पर अडिग रहे उनके सामने कई विकल्प थे जिनमे से सबसे बड़े विकल्प इस्लाम और इसाई धरम थे लेकिन इन दोनों ही धर्मो में से किसी को अपनाने पर शुद्र सनातन-आर्यों कि विचारधारा से अलग हो जाते , ऐसा होने पर सनातन-आर्यों को उनका राजनैतिक लाभ भी नहीं मिलसकता था , और अगर by luck शुद्र मुस्लमान होजाते तो इनका राज करने का सपना सपना ही रह जाता , इसलिए बाबा साहेब से इस्लाम और इसाई धरम कि बुराइया ही कि गयी , अब यहाँ एक मसला और है कि अगर सनातन-आर्य धरम एक सम्पूर्ण धरम है तो उसकी अच्छाईया बताकर बाबा साहेब और तमाम शुद्रो को सनातन-आर्य धरम में कियो नहीं लेलिया गया बाबा साहेब और तमाम शुद्रो को पंडित या ब्रह्मण कियो नहीं बना लिया गया ,,,
सनातन-आर्यों कि इस मानसिकता को जान्ने के लिए मै बताना चाहुगा कि सनातन-आर्यों ने बाबा साहेब को सनातन धरम को अपनाने या वेदों को अपनाने का प्रस्ताव नहीं दिया , इसकी दो वजह हो सकती है
1- उनकी मानसिकता अब भी वही थी और वे अपने धरम को अछूतों से बचाना चाहते थे,
2- वेदों में इस्लाम कि सच्चाई के सबूत मौजूद है कही शुद्र उन्हें देख कर मुसलमान ना होजाए ,
क्योकि लोकतंत्र में राजशाही ताकत पे नहीं जनसँख्या पर आधारित है , इसी लिए बाबा साहेब को उन्ही कि विचार-धारा वाले धरम कि और मोड़ा गया ताकि सनातन-आर्य बहुसंख्यक हो जाए और उन्हें ही हमेशा सत्ता प्राप्त हो ,,,,,,,,

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