Saturday, 23 July 2011

"इन्किलाब जिंदाबाद"


हिंद की मिटटी को निगार हिंद का सलाम,

शुरू अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और रहम वाला है....

ये पैगाम कौम के नाम ताकि सुरु हो सके जद्दोजहद अपने वतन में अपना हक़ पाने की ! ... 
तो करो आगाज

करो आगाज  तौहीद का , क्योकि बचाना है कौम को काफ़िरो से !...
करो  आगाज  इन्किलाब  का , क्योकि  हमें  पाना  है  हक़  अपने  वतन  का !...
करो  आगाज  इल्म  का , क्योकि    हमें  बनाना  है  अपनी  कौम  को  सबसे  आला !...
करो  आगाज  सियासत  का , कियोकी  जवाब  देना  है  दुसमन  की  हर  चाल  का ,
करो  आगाज  जमात  ( पार्टी  ) का , क्योकि  पहुचना  है  हमें  तौहीद को , इल्म  को  और

इन्किलाब  को  अपनी  कौम  के  बच्चे - बच्चे  तक  ,
हौसला  करो  ऐ  मोमिनो ! अंजाम  दो  अरमानो  को , यही  वक़्त  है , सही  वक़्त  है ,
दिल  से  तलब  करो  अपने  हक़  को   

=== हक़  बर  हक़  === है .......

जो  हमें  पाना  है , और  हमें  हासिल  करना  है  वो  सब   जो  हमसे  छीना गया . हमारी जबान  से  लेकर हमारी  जमीन  
तक , सनातन-आर्यों  ने  हर  चीज  पर  अपना  कब्ज़ा  कर लिया  

और  हम  बस  देखते  रह  गए , गुमराही  की इन्तहा  तो  
ये  हुई  के  हमी  ने सनातन-आर्यों को हिन्दू  नाम दिया ,  
जिसकी  वजह  से  हमारा वतन , हमारी  जमीन  और  
हमारी  जबान  इन  सनातन-आर्यों  की  जागीर  बन  गई , 
बस  फिर  किया  था सनातन-आर्य हमें हमारे  वतन  से  
जुदा  करने  में  जुट  गए , जब  से  लेकर  आज  
तक  सनातन-आर्य इसी जुस्तुजू  में  है ,
 ख़तम करना  

चाहते  है  ये  हमको  और  हमारी  तहजीब  को ,,,,,,,,,,,,


लेकिन रहमत  है  रहम करने  वाले  उस  रब  की , 
जुल्म -ओ -सितम  के  बीच , कुछ  हादसों को  छोड़  

कर , हमारी  कौम  आज  भी  सही  सलामत है ,

और अखबारों  और  मेग्जीनो  और  हमारे दिलो  में आज  भी  इस  वतन  में हमारी  जबान  जबाने -हिंद  
(  उर्दू  ) जिन्दा और  सही  सलामत  है , 

में  इसे  
अल्लाह  की  रहमत  ही  कहुगा  कियोकी
  सन -१८५७  

के  बाद  दुस्मानो ने  हमारी  कौम  और  हमारी  जबान 
के  खिलाफ  न  जाने  कितनी  चाले चली  और  न  जाने  
कितने  फरेब  दिए  , इन  चालो  और  फरेबो से  वो   
हमारी  कौम  और हमारी  जबान   को  मिटा  तो  नहीं  
सके  लेकिन  इन्हों ने हमारे  हक़  को  जरूर  छीना  है , 
आज  के  दौर  में  ऐसा  लगता  है  के  न तो  हमारी  
कौम  को हमारे  मुल्क  पैर  कोई  हक़ है और नहीं हमारी   

जबान को ,

आज  हमारा  वतन  फिरका  परस्तो  की  
जागीर  बन  चूका है  और  हमारी जबान  एक  सुनेहरा  
ख़ाब   बन  कर  रह  गई , अगर  हमें  अपनी  कौम  को इस  मुल्क पर  हक़  दिलाना  है  और  अपनी  जबान  के  सुनहरे  कहब  को  हकीकत  बनाने है तो  दुसमन की चली  हर  उस  चाल  हर  उस  फरेब  को  तोडना  होगा , जो दुसमन   ने सन -1857 से  अब  तक  रचा  है , 
हमें  हर  उस  तिलिस्म  हर  उस जाल  को  तोडना  होगा  जो हमारी  कौम  को  हमारे  वतन  से  जुदा  करता  है ,और
सनातन-आर्यों
  के  लिए इस  वतन  को सिर्फ  अपना  बताने  की  वसीयत  बन  जाता है  , और  इसी  फरेब , इसी  तिलिस्म  से बनी इस  जेहनी  वसीयत  का  सबब  है की  हमारे  वतन  में  तमाम  गैर मुस्लिम  खुद  को  सिर्फ  हिन्दू कहकर  हमारे  वतन को  अपनी  जागीर  बता  देते  है  और  हमारी  कौम  मुस्लमान  होने  की वजह से  अपने  ही  वतन  में  पराई  बनकर  रह  जाती  है , 
किया  मजहब  वतन परस्ती  का पैमाना  है  ? 
किया  जबान  या  भासा  इंसान  की वतन परस्ती  का  सबूत  हो  सकती  है  ?
अगर  नहीं  तो  फिर  क्यों  हमारी  कौम और  हमारी  जबान  के  साथ  गैरो जैसा  बर्ताव  किया जाता  है ?
अगर सनातन-आर्य यहाँ  पैदा  हुवे  है  तो  हमारी  कौम  भी  इसी  मिटटी  की  पैदाइश  है , तो फिर हमारे  साथ  गैरो  जैसा   बर्ताव  कियो  किया  जाता  है  ? 
क्यों
हमारी 
 कौम  को  हर  पल  सक  की नजर  से  देखा  जाता  है ? 
कियो  हम  अपने  ही  वतन में  पराये  है  ? 
हमारा  ये  वतन  हमारा होकर  भी  हमारा  कियो  नहीं  ?........ 
ये  ही  वो  सवाल  जो  मुझसे  पहले  भी  ना  जाने  कितने लोग  उठा चुके  है , लेकिन  मुझे  मेरे  हिंद  की  अवाम  के  सामने  ये  सवाल  नहीं उठाने  है ,मुझे  तो  मिटाना  है  इन  सवालो  को , इन  का  जवाब  देकर ,मुझे  इन  सवालो  का  जवाब  देना है , में  इन  सवालो  का  जवाब  जरूर  दुगा ,...और  
ये  जवाब  में  दुगा  अपनी  कलम  से  , इसी कलम  से  बदलेगी तकदीर  , मेरी  , मेरी  कौम  
की  और  मेरे  वतन  की , इसी  कलम  से  आयेगा
इन्कलाब ...
वो  इन्कलाब  जो  अल्लाह  का  फरमान  है , 
वो  इन्कलाब  जो हक़ परस्तो  की पहचान  है ,
वो  इन्कलाब  जो  मेरा  अरमान  है ,
इसी  इन्कलाब  से आयेगा  वो  बदलाव  जिसके सबब  , हमारी  कौम  का  हर  बच्चा , बूढ़ा  और जवान  इस  वतन  पर  अपना हक़  जाहिर कर  देगा  और  गैर मुस्लिम  के  मुह  पर  ताला   लग  जायेगा  ,...... बस  अब  जरुरत  है  तौहीद  की , इखलास  की जरा  सोचो  मोमिनो  इस वतन  में  25% से  30% हमरी  आबादी  है , लेकिन  फिर भी  हमारा  कोई  सियासी  वजूद  नहीं  वजह  है  तौहीद  की  कमी  इखलास  की  कमी ,,,,,,, 
ऐ  मेरी कौम  के  लोगो  ऐ  मेरे  दोस्तों  अल्लाह  के  वास्ते इन  कमियों को  इस  कौम  से  जुदा  करदो , हमारी  इन्ही  कमियों  की  वजह  से मजबूत  हुवा है  हमारा  दुसमन , और  अगर  हमने  अपनी गलतियों  को  नहीं  सुधार  तो दुसमन  और  भी  मजबूत  हो  जायेगा , ऐ  मेरी कौम के  लोगो , किया चाहते हो  तुम , दुश्मन  को  मजबूत  करना है , या  अपनी  कौम  की  भलाई ,  और  ये  भी समझ  लो  की  हमारी  कौम  की  भलाई  किस  काम में है , 
यकीनन  हमारी कौम  की  भलाई तौहीद  और  इख्लाश  में है , 
में  याद दिलाना  चाहता  हु वो  वक़्त  जब  हिंदुस्तान  के   बटवारे से पहले   भगवा ब्रिगेड ने जनसंघ नाम  से  एक  तंजीम  बनाई , और गैर मुस्लिम  में से हर  फिरके , हर  उची और  हर  नीच  जात  के  लोग , गैर मुस्लिम  में  फैले  छुवाछुत  जैसे कोढ़  को मिटा  कर इस  तंजीम  के मेम्बर  बने , और  इस  तंजीम  के  कई  किस्से  है जिनमे  पंडित  और  राजपूत जैसे  उची  जात  के  लोग  दलितों  और  बाकि नीची  जात  के लोगो  जिन्हें  वे  अछूत  कहते  थे , जिन्हें  छु   कर  उनका धरम  भ्रस्ट  हो  जाता  था , उन  लोगो  के  साथ  वे  उठने  बैठने  और  खाने पीने लगे , 
इन  लोगो  के  ये  सब  करने  की  सिर्फ  एक  वजह  थी , मुसलमानों  से मुकाबला  करना , खुद  एक  जुट  होकर  मुसलमानों  को  कमजोर बनाना , मुसलमानों की  माली  हालत  ख़राब  करना और  गैर मुस्लिम  को  खुश  हाल  बनाना ,, ये हकीकत है!..... और  ऐसी  कई  मिसाल  है जिनसे  में अपनी  बात साबित  कर  सकता  हु , 
और  एक  मिसाल  तो  एकदम  नयी  है , सब  को  यद्  होगा मालेगाव  में  गाय  हत्या  पर  कितना  बबाल  हुवा  किस  तरह  कौमी  दंगो जैसा माहौल  बन  गया , मुस्लमान  डर गए  सहम  गए , शायद  फिर  हमारी कौम  पर  बे  वजह  जुल्मो  सितम  होने  वाला था , वजह  थी    सनातन-आर्यों  की  दोगली आस्था  और  भारत  का  दोगला  कानून , 
भारत  के  कानून  के मुताबिक  गाय हत्या  जुर्म  है  कियोकी  गाय  को  सनातन-आर्य  माँ  मानते  है , ये  कानून  बनाया है  इन्ही  फिरका परस्त  सनातन-आर्यों  ने ,
अब  में  बताना  चाहुगा  गाय  की  हत्या में  किसका  फायदा  होता  है और  गाय  की  हत्या  करता  कौन  है , नाम  तो आता  है  मुसलमानों का , क्योकि  मुस्लमान  गोस्त खाते  है , ये  गोस्त मुसलमानों  तक  पहुचता   है  कसाई  के  जरिये , कसाई  भी  मुसलमान   अब तोहमत मुसलमानों  के  सर  आजाती  है , लेकिन  हकीकत  कुछ  और  है , 
जिसको  समझ  ने  के  लिए  कसाई  की  जिन्दगी  को  समझना  जरुरी  है ,कसाई  का  काम  है  जानवरों  को  काट  कर  उनका  गोस्त बेचना और  अपनी  रोज़ी रोटी  कमाना , ये  उसका रोज़गार  है , ये  उसका  कारोबार  है , दुनिया  का हर बच्चा , बूढा   और  जवान  ये  बात  जनता  है, 
के  कसाई  कभी  किसी  जानवर को  उसकी  खिदमत करने  के  लिए  नहीं  खरीदता , वो खरीदता  है  उसे काट  कर उसका गोस्त  बेचने  के लिए , सब  कहते 
है  कसाईं  जानवरों  की मौत  का  दूसरा  नाम  है , लेकिन  में  कहता  हु  के कसाई  तो  एक  कुवा  है  इस  कुवे  में  जो  कोई  जानवर  गिरता है उसे  कोई  नहीं  बचा  सकता , कसाई  किसी भी  जानवर  को  सिर्फ जानवर  समझता  है  और  उसे  काट  कर  बेच  देता  है , लेकिन  सनातन-आर्यों  गाय  को  अपनी  माँ  मानते  है लेकिन  फिर भी  कसाई  को  बेच देते  है , 

तो  कौन  है  गाय हत्या  का  जिम्मेदार ? 
कौन  है  माँ  का हत्यारा ? 
कौन  है  मुजरिम ? 
जुल्म  कौन  करता  है ? 
गलती  किसकी  है ? 
और सजा  किसको  मिलनी चाहिए ? ... 

कसाई  नाम  के  उस  कुवे  को , या  फिर  उस सनातन-आर्य  को  जो  चन्द  पैसो  के  लिए  अपनी माँ  को  कसाई  नाम  के  उस  कुवे  में फ़ेंक देता  है  ,... 
यकीनन  सजा  उस  सनातन-आर्यों  को  मिलनी चाहिए ,... 
लेकिन देखो  ये  भारत  का  दोगला  कानून  सजा  कसाई  को  देता  है , और  देखो जरा इन  सनातन-आर्यों  की  दोगली  आस्था , ये  आस्था नहीं  ड्रामा  है , एक  सोची समझी  नीति  है , फरेब  है , चाल  है  ये  इन  सनातन-आर्यों  की , 
हां  ये  भी  उन तमाम  चालो  में  से  एक चाल  है जिसके  जरिये  ये  सनातन-आर्यों  मुसलमानों  को नुक्सान  पहुचाते  है  और  
गैर मुस्लिम   को  फायदा  पहुचकर  उन्हें  खुशहाल बनाते  है , 
किया  मेरी  इस  मिसाल  से  जाहिर  नहीं  होता  के  किस  तरह  काफ़िर एकजुट  होकर हमारी  कौम  को  नुक्सान  पंहुचा  रहे  है , वो कारोबार  जिन्हें मुस्लमान  जियादा  करते है , उनको  बर्बाद  किया  जा  रहा  है  और  सरकारी नौकरियों  में  भी  मुसलमानों  को  जगह  नहीं दी  जाती , तो  किया  होगा  हमारी कौम  का  मुस्तकबिल , क्या  होगा  हमारा  फ़ियुचर  , अगर यही  हाल  रहा  तो हमारी  कौम  की  हालत तूफ़ान  में  फसी  कसती  में  सवार  लोगो  जैसी  होगी , तो किया  तुम  नहीं  जागोगे  तूफ़ान  आने  से  पहले ,
ऐ  मेरी  कौम  के  लोगो  तोड़  दो ये  गफलत की  नींद , उठो  एक  नए  इन्किलाब  के  साथ , सुधारों  अपनी गलतियों  को , और  सीख  लो सबक !
इस्लाम  से ,
कुरान  से ,
अगर  दीन  से नहीं  तो  दुनिया से  सीखो ,
अगर  दुनिया  से  भी  नहीं  सीख  सकते  
तो  इन गैर मुस्लिम  से  सीखो ,
सीखलो ! ... किस  तरह  एकजुट  होते  है  ये  
गैर मुस्लिम हमारी  कौम  का  मुकाबला  करने  के  लिए , हमारी  कौम  को   हराने  के  लिए ,और  हमारी  कौम  पर जुल्म -ओ -सितम करने के  लिए ,
सीख  लो  इन  से  ये  एकता का  सबक , सीख लो , और सियासत  का  सबक  भी  सीखो , तुमने  नहीं  देखा ,
इन  लोगो  में  एक  के  बाद  एक  नेता  उभरता है , और  बड़े  नेताओ  में  शुमार हो  जाता  है , फिर  वो  अपनी  कौम  की  भलाई  भी  करता  है , और  हमारी  कौम पर वार  भी  करता  है , क्यों  इनके  नेता  इतनी  जल्दी  बड़े  नेताओ  में शुमार  हो  जाते  है ,
क्यों  मुसलमानों  के  नेता  कभी  नेताओ  में  भी  नहीं गिने  जाते ? कियो ? 
आखिर  किया  वजह  है  की  इस  वतन  के  आजाद  होने  के  61 साल  बाद  भी  हमारे  पास  ऐसा कोई  इंसान  नहीं  जिसे  हम  अपना  नेता बता सके , किया  मुसलमानों  में  क़ाबलियत  की  कमी है , नहीं  हरगिज़  नहीं ,क़ाबलियत  बहुत  है  लेकिन  कुछ  कमी  जरूर  है , उस  कमी   को  जाहिर करने  के  लिए  में  मिसाल  देना  चाहुगा   इनके के  उन नेताओ  की  जो  एक  अदना इंसान  थे , और  एक  आला  नेता  बन  गए , मिसाल  है  अडवानी  की , 
मिसाल है  बाल  ठाकरे  की , 
मिसाल  है नरेन्द्र  मोदी की , 
जरा  इनकी  सियासी जिंदगी  पर  नजर  डालो , इन  नेताओ  ने  जरा  सी  अपनी कौम  की  भलाई  का झासा दिया   और  इन लोजो ने  इनकी हिमायत की  और  इन्हें  सर  आखो पर बैठा  लिया , लेकिन  हमारी  कौम   में  यही  कमी  है , हमारी  कौम  अपने नेताओ  की  हिमायत नहीं करती , और  न  ही  कौम  के  लोग  अपने  गुजरे  ज़माने के  बादशाहों की  इज्जत  करते  है , ऐ  मेरी  कौम  के  लोगो  अपने  बादशाहों की इज्जत  करो  उनसे  सियासत  का  सबक  सीखो !  किस तरह उन लोगो ने अकेले पुरे मुल्क पर सदियों हुकूमत की, और अपने  नेताओ  का इन्तखाब करो  और  उनकी  हिमायत  करो !, क्या   कोई  है  करोडो  मुसलमानों  में  जो  इन सनातन-आर्यों  की  सियासत  समझ  सके , उनका जवाब  दे  सके , इन  भगवा  नेताओ का जवाब  दे  सके , ऐ  मेरी  कौम  के  नेताओ  सामने  आओ  और  संभाल  लो  कौम  की बागडोर , करो कौम  की  पैरवी , कुछ  ऐसे  कदम  उठाओ  जिससे  हमारी  कौम इस  मुल्क  में  हिफाजत से  रह  सके , सुकून  से  रह  सके , आज  का माहौल 
देखो , हर  तरफ  दहशत  है ,
ये  दहशत हिंदुस्तान  में  फैलता  कौन है ? येही  भगवा ब्रिगेड वाले  फैलाते  है  दहशत , ये  बात  साबित  हो  गई , बाबरी मस्जिद  के  फैसले  से, 
किया  तुम्हे  खबर  है  कौम  वालो ! ये  भगवा ब्रिगेड वाले   जो बाबरी मस्जिद  का  फैसला  आने  के  बाद  अमन -ओ -आमान  
का  पैगाम  दे  रहे है , इन्ही  लोगो  ने  फैसले  को  मुसलमानों  के  हक़  में  होता  जानकार गुप -चुप  तरीके  से  दहशत  का  फरमान जारी  कर दिया  था , यही  वजह थी  जो  ३०सितम्बर 2010  के  दिन  हर  तरफ  सन्नाटा  था , लेकिन  भारत  के हाकिमो  (जजों) ने  कानून  के खिलाफ  भगवा ब्रिगेड   के हक़ में फैसला सुना दिया ,भगवा ब्रिगेड वाले  अमन-ओ-आमान 
का  फरेब  देने  लगे , मुसलमानों  ने  कही  हुज्जत तक  नहीं  की , कही  एक  नारा  भी  न  लगाया ,अगर  फैसला  मुसलमानों  के  हक़  में जाता  तो  ये  भगवा ब्रिगेड वाले यकीनन दहशत  फैलाते  और  फसाद  करते , भगवा ब्रिगेड  के  काले  मनसूबे  पुरे  तो  नहीं  हुवे  लेकिन  ये  बात जरूर साबित  हो  गई   के  इस  वतन  में  दंगे -फसाद  कौन  करता  है ,ऐ  मेरी  कौम  के !लोगो  भगवा ब्रिगेड वाले   एक बार  वाही  सब  करने की  फिराक  में  थे  जो  इन्हों  ने  मुल्क  के बटवारे   के  बाद  किया ,उसके बाद  भी  अलग -अलग  सुबो  में  कितनी ही  बार मुसलमानों  पर  
जुल्म -ओ -सितम  कर  चुके  है ,
याद  करो  उस  वक़्त  को  जब  गुजरात  में  मोदी  की  सरकार    में  मुसलमानों पर  जुल्म  किया  गया ,मुसलमानों  को  कतल  किया   गया, खून  बहाया  गया , जिन्दा  जलाया  गया , औरतो  को  बेइज्जत किया  गया ,मुस्लमान हमिला  का  सरे -आम  पेट  चीर  दिया  गया , और हम कुछ भी  न  कर  सके , 
ऐ  मोमिनो  जो  हुवा  बहुत  बुरा  हुवा , लेकिन  आगे ऐसा  न  हो  पाय !  इस  लिए  
पढ़  लो  तौहीद  का  कलमा ,
उठालो  तौहीद  की  तलवार ,
बुलंद  करो  इन्किलाब  का  नारा ,
कहदो  इन्किलाब  जिंदाबाद .............


इन्किलाब  जिंदाबाद .............


 हमें  जीतना  है  दुसमनो  से , फ़तेह  करना  है  इन्हें ,
हमें  अपना  बनाना  है  इस  वतन  को , इस  मिटटी  पर  हमारा  हक़  है ,
और  हमें  ये  हक़  पाना  है , और  ये  सब  हम  कर  सकते  है  तौहीद  के
जरिये , इन्किलाब  के  जरिये ,
बस  इन  को  अपना  हथियार  बनालो  और  फिर  देखो ......

बदलेगी  फिजा  रंगीन  ये  जब  तदबीर  हमारी  बदलेगी !
तदबीरो  के  आगाज  से  ये  तस्वीर  ही  सारी  बदलेगी !
हो  जायेगे  चुप  काफ़िर  सरे  जो  कहते  है  हिंदुस्तान  मेरा ,
हक  होगा  हमारा  मिटटी  पर  जागीर  ये  सारी  बदलेगी !....

नसीम  निगार  हिंद  

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