Tuesday, 6 December 2011

"rss की अवैध संतान बनी आजाद हिन्दोस्तान के लिए सबसे बड़ा श्राप"


बाबरी मस्जिद को इस देश सबसे बड़ा घोर विवादित मसला कहा जाता है, एक ऐसा विवादित मसला जिसपर अंग्रेजी शाशन से पहले कोई विवाद नहीं था, लेकिन अंग्रेजी शाशन के अंतिम चरण में और देश की आजादी के बाद rss द्वारा जान-बूझ कर झूटी कहानी बना बनाकर इस मसले पर विवाद खड़ा किया गया, और एक सोची समझी प्लानिंग के तहत बाबरी मस्जिद में राम का जनम कराया गया, ये एक हकीकत है जिसका सबूत भी मौजूद है,

इस विडियो में:-

मौलाना अब्दुल कलाम आजाद और गांधी जी का सपना था कि हिन्दुस्तान पर सभी जाती के लोगो का सामान अधिकार हो, सब मिलजुल कर इस देश पर राज करे और अपना विकास करे, और शायद नजदीक ही था कि आजादी के बाद इस देश में सभी जाती के लोग मिल-जुल कर राज करते,
लेकिन ये सपना साकार ना हो सका वजह थी rss, देश के बटवारे के बाद इस देश में सिर्फ rss ही एक ऐसा ग्रुप बचा था जिसके सम्बन्ध साम्प्रदायिकता से थे, इसी ग्रुप ने आजादी के बाद सबसे पहले महात्मा गाँधी की जान ली, जैसे की इस ग्रुप का नाम है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ये नाम सुनकर तो ये ग्रुप बड़ा सीधा लगता है, लेकिन इश्क और मुश्क छुपाये नहीं छुपते और यही हुवा,
rss और साम्प्रदायिकता के प्रेम सम्बन्ध भी जियादा दिन नहीं छुप सके, शीघ्र ही साम्प्रदायिकता और rss के अवैध संबंधो के फलस्वरूप rss ने एक गर्भ धारण किया, साम्प्रदायिकता और rss के अवैध संबंधो के चलते rss के गर्भ से बाबरी मस्जिद के गुम्बद के नीचे एक और काल्पनिक राम का दुबारा जनम हुवा, rss की इस अवैध संतान का पैदा होना आजाद हिन्दोस्तान के लिए सबसे बड़ा श्राप साबित हुवा, क्योकि जबसे बाबरी मस्जिद में इस काल्पनिक राम का जनम हुवा है तब से लेकर आजतक हिन्दोस्तान में दहशतगर्दी का बोलबाला रहा है, समय समय पर जगह जगह दंगे होते रहते है, सरे-आम इंसानियत का क़त्ल होता है, मजलूमों का खून बहता है, मासूमो की जान जाती है, माँ बहनों की इज्ज़त से खेला जाता है, इन कामो में सदैव rss और उसके सहयोगियों का ही हाथ होता है, और ये सारा अधर्म बड़ी ही शान से धरम के नाम पर किया जाता है,
और ये मसला भी अब बाबरी मस्जिद तक ही सिमित नहीं है, क्योकि rss और साम्प्रदायिकता के अवैध सम्बन्ध अभी ख़तम नहीं हुवे है और इन दरिंदो को बहाना तो चाहिये दहशत फ़ैलाने का इसलिए बाबरी मस्जिद का मसला अगर ख़तम भी हो गया तो rss के गर्भ से जल्द ही मथुरा का कृष्ण जनम भूमि या तेजोमय महल नामक मसला या अन्यकोई मसला शीघ्र जनम ले सकता है, 
यही सच्चाई है इनकी 
इसलिए किसी और से कुछ कहने से पहले मै अपनी कौम से बस इतना ही कहना चाहुगा:-

मुल्क की सूरत बदल जाने के बाद!!!
जुल्म और जिल्लत में ढल जाने के बाद!!!

ऐ मेरी मिल्लत तू आँखे खोल अब""
घर तेरा दंगो में जल जाने के बाद!!!

देख रोती है कोई माँ चीख कर""
पेट पर खंज़र वो चल जाने के बाद!!!

देती है कोई बहन तुझको सदा""
आबरू इज्ज़त निकल जाने के बाद!!!

रो रहे बच्चे है आर बूढ़े ज़ईफ़""
बेसहारो में वो ढल जाने के बाद!!!

और कितनो का बहेगा खून यु""
बेगुनाह बनकर कुचल जाने के बाद!!!

अब भी तू कोशिश क्यों कुछ करता नहीं""
कौम पर शमशीर चल जाने के बाद!!!

क्या कहेगा रब से मुसलमान तू""
उस खुदा के पास कल जाने के बाद!!!

जुल्म सहना भी है खुदमे एक गुनाह""
छीन अपना हक निकल जाने के बाद!!!

बस यही 'अफरोज' की है इल्तेजा ""
हक जता मिटटी में पल जाने के बाद!!!

Naseem Nigar Hind 

Friday, 18 November 2011

"सनातन-आर्यों की राजनैतिक लालसा और खोखली मानसिकता बनी हिन्दू धरम की उत्पत्ति का कारण"



आज हामारे देश में हिन्दू धरम और हिंदुत्व के नाम पर कई संगठन और राजनैतिक दल अपनी सियासी रोटी सेकते और अपनी राजनैतिक दुकाने चलाते है, हिन्दू धरम के नाम पर लोगो को लड़ाना, हिंदुत्व के नाम पर दंगे कराना इनके मुख्य हथियार है,
इतिहास गवाह है कि 18 वी सदी तक समस्त संसार में हिन्दू नाम का कोई धरम मौजूद नहीं था लेकिन 1857 में मुसलमानों कि हुकुमत ख़तम होने तक अंग्रेजो की नयी हुकुमत के साथ-साथ तीन-चार हजार साल से भी अधिक पुराने सनातन-आर्य धरम का एक नया नाम हिन्दू धरम भी सामने आता है,
(( ये एक अकाल सत्य है क्योकि सनातन-आर्य धरम के समस्त धार्मिक ग्रंथो में हिन्दू धरम नाम का कोई शब्द आजतक लिखा हुवा नहीं पाया गया, और ये शब्द सनातन-आर्य धरम के धार्मिक ग्रंथो में मिल भी केसे सकता है क्योकि ये फ़ारसी भाषा का लफ्ज़ है जिसका अपमान जनक अर्थ है- चोर, गुलाम या लुटेरा ))   
अब एक सवाल ये भी उठता है की अगर संस्कृत समस्त भाषाओ की जननी है तो सनातन-आर्य धरम को एक नया नाम देने के अवसर पर एक धनि भाषा संस्कृत एक निर्धन भासा में क्यों परिवर्तित हो जाती है और सदियों से देवताओं की भासा कही जाने वाली संस्कृत भासा यकायक मुगलों की भाषा यानि फ़ारसी पर क्यों आश्रित होजाती है?

इस सवाल का जवाब घिनोनी मानसिकता वाले उन सभी लोगो की पोल खोलता है जिन्होंने सनातन-आर्य धरम को हिन्दू धरम नाम देने के समय एक बार भी नहीं सोचा होगा की इसमें सनातन-आर्य धरम का अपमान है या सम्मान, चलो सनातन-आर्य धरम से अलग मै संस्कृत भाषा की बात करता हु, यहाँ संस्कृत भाषा प्रेमियों और सनातन-आर्य धरम प्रेमियों से मेरा एक सवाल है कि,,,
सनातन-आर्य धरम को एक नया नाम देने के अवसर पर समस्त भाषाओं कि जननी और देवताओं कि भाषा कही जाने वाली संस्कृत भाषा के समस्त शब्दों का त्रस्कार कर के मुगलों कि भाषा फ़ारसी से हिन्दू शब्द का लिया जाना क्या संस्कृत भाषा का अपमान नहीं????
यकीनन ये संस्कृत भाषा का अपमान है,,,
इसी लिए सनातन-आर्य धरम के सच्चे सेवक सनातन-आर्य धरम को आज भी सनातन-आर्य धरम ही कहते है, लेकिन हिन्दू धरम और हिंदुत्व के ठेकेदार बनने वाले सिर्फ ये लोग जिनका धरम से कोई लेना-देना नहीं है और ये हमेशा से सिर्फ और सिर्फ सत्ता के पुजारी रहे है,

और कुछ ऐसे लोग है जिनमे अपनी बुद्धि जैसी कोई चीज नहीं है, ये लोग सिर्फ वाही देखते है जो इन्हें शातिर सनातन-आर्यों ने दिखाया है, और ये लोग वाही बोलते है जो शातिर सनातन-आर्यों ने इन्हें बताया है, ये अज्ञानी लोग उन्ही शातिर लोगो की पैरवी करते हुवे कहते है कि हिन्दू धरम 18 वी सदी से पहले भी मौजूद था, मुगलों और सल्तनत काल से पहले भी मौजूद था, फ़ारसी ज़बान के हिन्दुस्तान में आने से पहले भी मौजूद था, इस्लाम के यहाँ आने से पहले भी मौजूद था, इसाई धरम के उदय से पहले भी मौजूद था, बौद्ध धरम के उदय से पहले भी मौजूद था, इन सभी लोगो की जानकारी के लिए मै बताना चाहुगा की धरम तो बहुत पहले से मौजूद था लेकिन उस समय उस धरम को सनातन-आर्य धरम या वैदिक धरम ही कहा जाता था नाकि हिन्दू धरम,


ये एक अकाल सत्य है कि इस देस में हिदू शब्द फ़ारसी की ही देन है और एक अकाल सत्य के लिए सबूत माँगना या सबूत पेश करना मूर्खता से जियादा और क्या होगा, और जो इस अकाल सत्य को झुटलाना चाहते है मै उन लोगो से जरूर कहुगा कि कोई एक सबूत तो ऐसा पेश करे जिससे ये साबित होजाये कि हिन्दू शब्द फ़ारसी भाषा का नहीं, संस्कृत भाषा का है, और फ़ारसी भाषा के इस देश में आने से पहले भी इस देश में इस्तेमाल किया जाता था, बेशक ऐसा कोई तथ्य मौजूद ही नहीं है,
बस ये तो सत्ता कि लालसा में शातिर लोगो द्वारा बनाया गया सियासत का जाल है, जिसे सनातन-आर्य धरम कि जगह पर भोले-भाले लोगो को फ़साने के लिए शातिर सनातन-आर्यों द्वारा निर्मित किया गया,

इन्ही लोगो ने सत्ता की लालसा में लोकतंत्र के आगाज़ पर इन्ही के हाथो हमेशा से सताए गए लोगो को अपने धार्मिक-समाज का हिस्सा बताकर उनका समर्थन पाने के बाद बहुसंख्यक बनकर सत्ता पाने के लिए भोले-भाले लोगो को फ़साने के लिए हिन्दू धरम और हिंदुत्व नामक कई जाल बुने, क्योकि लोकतंत्र में सत्ता बल के आधार पर नहीं बल्कि सिर्फ और सिर्फ जनसंख्या के आधार पर पाई जा सकती है, इसलिय अब इन्होने शूद्रो, सिख्खो और अन्य जातियों को अपने राजनैतिक जाल यानि हिन्दू  धरम और हिंदुत्व में फ़साने की योजना बनाई जो कारगर साबित हुई,,,,

अब यहाँ पर एक तथ्य ये उभरता है कि
क्या सचमुच हिन्दू धरम लोगो को फरेब देकर लाभ उठाने की व्यवस्था का नाम है???
आइये गौर करे,,,,
इतिहास गवाह है की संसार में जबसे सभ्यता कायम हुई तब से लेकर आज तक इस दुनिया में हिन्दू नाम का कोई भी धरम पैदा नहीं हुवा, और हमारे वतन हिन्दोस्तान में भी हिन्दू धरम नाम का इस्तेमाल शातिर सनातन-आर्यों द्वारा अंग्रेजी शाशन के दौरान सनातन-आर्य धरम की खोखली और घिनोनी व्यवस्था को छुपाकर, अछूत और नीछ कहकर प्रताड़ित की गयी जातियों पर अपना धरम या अपनी व्यवस्था को थोपने के लिए किया गया, क्योकि घिनोनी मानसिकता वाले ये तुच्छ लोग शुद्रो को सनातन-आर्य बताकर पंडित या ब्रह्मण नहीं बनाना चाहते थे इसलिए इन्होने हिन्दू धरम नाम का एक जाल बुना जिसमे शुद्रो समेत उन सभी जातियों को फसाया जो सनातन-आर्य धरम द्वारा हमेशा से सताई गई,,,,
और सनातन-आर्यों के ये सब करने का एक मात्र कारण लोकतन्त्र ही था क्योकि,,,
हिन्दुस्तान में राजशाही ख़तम होने के बाद अंग्रेजी शाशन के दौरान ही भविष्य में लोकतंत्र की संभावनाए दिखने लगी थी, और लोकतंत्र में सत्ता जनसंख्या पर आधारित होती है,
क्योकि सनातन-आर्य अल्पसंखयक थे इसलिए सनातन-आर्यों को सत्ता हासिल करने के लिए शुद्रो की घोर आवस्यकता दिखाई देने लगी, अब सनातन-आर्यों के सामने सबसे बड़ी समस्या यही थी की उन शूद्रो को अपनी गोद में केसे खिलाये जिन्हें उन्होंने हमेशा अछूत कह कर प्रताड़ित किया है तब ये शातिर सनातन-आर्य इन भोले-भाले शूद्रो को हिन्दू नाम का झूला झुलाते है और केवल शूद्रो को ही नहीं बल्कि इन सनातन-आर्यों ने मुसलमान और इसाई धरम के लोगो को छोड़ कर अन्य तमाम धरम और जाती के लोगे को हिन्दू शब्द के जाल में फसाया और उन्हें मूर्ख बनाकर कर सत्ता हासिल की,

हिन्दू नाम का कोई धरम हिन्दुस्तान में तो किया बल्कि पूरी दुनिया में ना तो कभी था नाही आज है हिन्दू धरम हकीकत में फरेब का एक राजनैतिक जाल है,
ये साबित करने के लिए मै एक छोटा सा उदाहरण देना चाहूगा, उदाहरण है सनातन-आर्यों और शूद्रो का जैसा के सभी जानते है की सनातन-आर्य मध्य एशिया से हमारे इस वतन हिन्दोस्तान में आये, इन्होने ही सिन्धु घाटी जैसी सुद्रढ़ सभ्यता को तहस-नहस किया और उस तमाम इलाके पर अपना कब्ज़ा कर लिया, इसके बाद इस देस के मूल निवासियों को शूद्र की उपाधि देकर अछूत बताकर सदा के लिए त्रास्कार का भागी बना दिया, दुसरे शब्दों में हम ये कह सकते है कि सनातन-आर्यों ने सदा से ही शुद्रो को अपमानित किया, उनके साथ जानवरों जैसा बर्ताव किया, उन्हें प्रताड़ित किया और उन्हें जानवरों से भी बदतर ज़िन्दगी जीने पर मजबूर कर दिया, और यही सिलसिला सदियों तक चलता रहा,
या य़ू कहे कि ये सिलसिला 2500 या 3000 से भी अधिक सालो तक बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के आने तक चलता रहा और शायद ये सिलसिला आगे भी कभी ना बन्द होता अगर इस देश में लोकतंत्र कायम ना होता, क्योकि बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर के उदय के बाद तमाम शुद्र बाबा साहेब के समर्थक और आज्ञाकारी बन गये, बाबा साहेब ये अच्छी तरह जान चुके थे कि शुद्र जब तक शुद्र बने रहेगे उनका उत्थान नहीं हो सकता, शुद्रो से शुद्र और अछूत नाम का कलंक हटाने के लिए बाबा साहेब ने एक नए धरम की खोज शुरू करदी इधर सनातन-आर्यों की धरकने बढ़ गयी, इन्होने अपने बर्ताव बदलाव लाना शुरू किया, इन पाखंडियो की अपने बर्ताव में बदलाव लाने की एक मात्र मजबूरी लोकतंत्र ही थी, राजशाही की लालसा और लोकतंत्र ने ही इन्हें मजबूर करदिया जिसके चलते ये शुद्रो से हमदर्दी जताने लगे, और उन्हें गले लगाने लगे,,,
क्योकि लोकतंत्र में अपना राज कायम करने के लिए और मुसलमानों का सफाया करने के लिए  सनातन-आर्यों को शुद्रो की घोर आवश्यकता थी, 
क्योकि लोकतंत्र में बादशाही ताकत पे नहीं जनसँख्या पर आधारित होती है, इसलिए बाबा साहेब को उन्ही की विचार-धारा वाले धरम की और मोड़ा गया ताकि सनातन-आर्य अपनी विचार-धारा के लोगो के साथ बहुसंख्यक हो जाए और उन्हें ही हमेशा सत्ता प्राप्त हो,,,,,,,,
और हिन्दू धरम भी इसी राजनीति का एक हिस्सा मात्र था जिसका मुख्या उद्देश्य हिन्दुस्तान में रहने वाली सभी गैर-मुस्लिम और गैर-इसाई जातियों को मूर्ख बनाकर राजनैतिक लाभ उठाना था, और सनातन-आर्यों को इसमें पूर्ण सफलता भी मिल गयी,
इसका सबूत भी मै आपको दिखाना चाहुगा,,,
आप सभी को याद होगा बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर ने अपनी धरम परिवर्तन की इच्छा का ऐलान करते वक़्त कहा कि,,,
मै हिन्दू बनकर पैदा ज़रूर हुवा हु लेकिन हिन्दू रहकर मरू गा नहीं!!!
अब यहाँ पर गौर करने वाली बात ये है कि अगर हिन्दू धरम सच में सनातन-आर्य धरम ही है तो बाबा साहेब ने ये क्यों नहीं कहा कि,,,
मै सनातन-आर्य बनकर पैदा ज़रूर हुवा हु लेकिन सनातन-आर्य रहकर मरू गा नहीं!!!

बस इस षड़यंत्र को समझने के लिए बाबा साहेब के ये बोल ही काफी है,
आइये गौर करे कि उस वक़्त बाबा साहेब और तमाम शुद्र किस धरम के अनुयायी थे,,,

सनातन-आर्य धरम के :- धरम इंसानी आस्था से जुड़े उन नियमो और कानूनों को कहा जाता है जिन्हें इंसान अपनी इच्छा से अपनाता है और जो इंसान को जीने की राह बता कर उसके जीवन को खुशहाल बनाने में मदद करते है,
अब पहली गौर करने वाली बात ये है की
क्या सनातन-आर्य धरम के नियमो का पालन कर अछूत कहलाने में शुद्रो की इच्छा शामिल थी???
हरगिज़ नहीं बल्कि शुद्रो पर सनातन-आर्य धरम के ये नियम कानून जबरदस्ती थोपे गये, उन्हें अपने सामने नीछ और अछूत बनाए रखने के लिए,
दूसरी बात गौर करने वाली बात ये है कि
क्या सनातन-आर्य धरम ने शुद्रो को जीने की राह बता कर उनके जीवन को खुशहाल बनाने में मदद की है???
जवाब फिर वही ,,,,, हरगिज़ नहीं!!!! सनातन-आर्य धरम ने सदा ही शुद्रो को सिर्फ और सिर्फ दुःख, त्रास्कार और प्रताड़ना ही दी है, जीने के अधिकार छीन कर उन्हें जीते जी नरक में ही धकेला है,
इस स्थिति के बाद भी अगर हम ये कहे की शुद्र सनातन-आर्य धरम को अपना धरम कहते थे तो ये अतिश्योक्ति होगी, मै समझता हु की ये कहना भी बाबा साहेब और तमाम शुद्रो का अपमान होगा की ये सनातन-आर्य धर्मी थे,,,

जैन धरम के :- शुद्र जैन धर्मी नहीं थे, जैसा की इतिहास में लिखा है,

बौद्ध धरम के :- इतिहास गवाह है की जब बाबा साहेब ने ये शब्द कहे उस समय तक बाबा साहेब और तमाम शुद्र बौद्ध धर्मी भी नहीं थे, बाबा साहेब ने नए धरम के तौर पर बौद्ध धरम को अपनाया,

सिख धरम :- बाबा साहेब और तमाम शुद्र सिख भी नहीं थे,

पारसी धरम :- बाबा साहेब और तमाम शुद्र पारसी भी नहीं थे,

इसाई धरम :- बाबा साहेब और तमाम शुद्र इसाई भी नहीं थे, लेकिन बाबा साहेब के सामने नया धरम अपनाने के लिए ये धरम विकल्प के रूप में अवस्य था,

इस्लाम धरम :- बाबा साहेब और तमाम शुद्र इस्लाम के भी मानने वाले नहीं थे, लेकिन बाबा साहेब के सामने नया धरम अपनाने के लिए ये धरम विकल्प के रूप में अवस्य था,,,


हकीकत तो ये है कि उस वक़्त बाबा साहेब के पास कोई भी धरम नहीं था,
और ये जो था ही नहीं इस का नाम हिन्दू धरम था और आज भी यही स्थिति है

इस तरह साबित होता है कि हिन्दू धरम सनातन-आर्यों कि सिर्फ एक राजनैतिक चाल थी जो शुद्रो और अन्य जातियों को अपने जाल में फ़साने के बाद बहुसंख्यक बनकर लोकतंत्र में सत्ता पाने के लिए चली गयी थी,

बस इतनी सी कहानी है हिन्दू धरम कि
समझदार को इशारा काफी,,,,,,,,,
और मुर्ख के लिए लम्बी बहस भी कम,,,,,,,

Naseem Nigar Hind


Monday, 7 November 2011

"तुम करो तो धर्म और हम करे तो हिंसा"




NOTE- ( जीवो  को  मारना  , मांस  मछली  खाना  , हर  धरम  में  किसी  न  किसी  रूप  में  पाया  जाता  है ,
मै  ये  लेख  लिख  रहा  हु  क्योकि  नफरत  फैलाने  वालो  और  इस्लाम  को  बदनाम  करने  वालो  की  सच्चाई  सबके  सामने  आनी  चाहिए , )

आज  eid-u-l azha के  दिन  मेने  FB पर  जगह -जगह  मुसलमानों  की  अकीदत  से  खिलवाड़  करने  वाले  पोस्ट  देखे ,,,

कुछ  अज्ञानी  लोग  अपनी  तुच्छ  राजनीति  के  तहत  इस  त्यौहार  के  बारे  में  लिख -लिख  कर  जानवरों  को  काटने  की  घटना  बता  बता  कर , जानवरों  पर  रहम  करने  की  दुहाई  दे -दे  कर , मुसलमानों  और  इस्लाम  को  बदनाम  करना  और  हिंसात्मक  बताना  चाहते  है ,

इन  लोगो  की  मंशा  सिर्फ  और  सिर्फ  ये  है  की  लोगो  के  दिलो  में  इस्लाम  के  लिए  नफरत  पैदा  की  जाए , जिसके  चलते  सभी  जातीय  इस्लाम  के  सर्वश्रेष्ट  धरम  होने  के  बाद  भी  मुसलमान  न  हो ,

ऐसी  मनसा  रखने  वाले  ये  वे  लोग  है  जो  गाय  हत्या  को  पाप  कहते है , क्योकि  इस  धरम  के  मुताबिक  गाय  की  ह्त्या  करना  पाप  है ,
लेकिन  ये  बात  किया  सिर्फ  गाय  तक  सिमित  है , क्योकि  इस  त्यौहार  में  गाय  की  कम  बल्कि  बकरों , भेंसो  और  ऊँटो  की  कुर्बानी  जियादा  तादाद  में  की  जाती  है ,
अगर  जीवो  पर  दया  का  ये  नाटक  सिर्फ  गाय  तक  सिमित  नहीं  तो  काली  के  मंदिरों  में  दी  जाने  वाली  बलि  किस  धरम  का  हिस्सा  है , अब  यहाँ  पर  कुच्छ  लोग  ये  कहकर  धार्मिक  सफाई  दे  सकते  है  की  ये  बलि  प्रथा  कर्मकांड  और  आडम्बरो  की  देन  है  सनातन -आर्य  धरम  का  हिस्सा  नहीं , 

यहाँ  पर  मै  सनातन-आर्य  धरम  के  तीन  पूज्य  देवताओं  में  से  एक  भगवान्  शंकर  की  वो  घटना  याद  दिलाना  चाहुगा  जिसमे  वे  अपनी  नहाती  हुई  पत्नी  से  मिलने  की  कोशिश  करते  है  और  उनका  पुत्र  गणेश  उन्हें  वह  जाने  से  रोकता  है  क्योकि  गणेश  की  माँ  ने  उसे  ऐसा  कहा  था  इस  पर  शंकर  भगवान  घुस्सा  हो  जाते  है  और  गणेश  का  सर  काट  देते  है , तब  पार्वती  रोष -विलाप  करती  है  और  अपने  पुत्र  को  फिरसे  जिंदा  करने  की  जिद  करती  है , अब  शंकर  एक  हाथी  के  बच्चे  का  सर  काट  कर  गणेश  को  जिंदा  करते  है ,
अब  जरा  गौर  कीजिये  यहाँ  भी  एक  हत्या  हुई  है  लेकिन  नाही  ये  कोई  अधर्म  है  ना  कोई  पाप , और  नाही  कोई  हिंसा ,

मै  आप  सभी  को  एक  दूसरी  घटना  और  याद  दिलाना  चाहुगा  ,

क्या  आप  जानते  है  की  जिस  वक़्त  सीता  को  रावन  उठा  कर  ले  गया  उस  वक़्त  राम  कहा  थे ?
आप  सबको  ये  जानकार  हैरानी  होगी  की  मर्यादा  पुरुषोत्तम  श्री  राम  उस  वक़्त  एक  हिरन  का  शिकार  करने  गए  थे ,
ये  एक  बहुत  बड़ी  सच्चाई  है  जिससे  मै  आप  सब  को  रूबरू  कराना  चाहता  हु , जी हा  वो  सच्चाई  जो  चीख -चीख  कर  कहती  है  की  जीव  हत्या  सनातन -आर्य  धरम  में  भी  मौजूद  थी ,
लेकिन  आज  के  दौर  में  सिर्फ  और  सिर्फ  मुसलमानों  और  इस्लाम  को  बदनाम  करने  के  लिए  इन  बातो  को  उछाला  जाता  है ,
ये  सब  एक  घिनोनी  राजनीति  का  हिस्सा  है  जो  सिर्फ  और  सिर्फ  मुसलमानों  के  खिलाफ  तैयार  की  गई  है , इसी  राजनीति  के  तहत  गाय  हत्या  के  आरोप  में  सिर्फ  मुसलमानों  को  सजा  दी  जाती  है , लेकिन  गाय  हत्या  करता  कौन  है ,
आइये  गौर  करे ,,,,
गाय  हत्या  का  मुख्य  कारण  है, गाय  के  मांश  का  बेचा  जाना , गाय  के  हत्यारे  को  सामने  लाने  के  लिए  सबसे  बड़ा  और  अहम्  सवाल  यही  है  की ,,,
गाय  का  मांश  बेचता  कौन  है ?
हा  हा  हा  इस  सवाल  पर  तो  सब  लोग  मुह  उठाकर  यही  जवाब  देगे  की  कसाई  बेचता  है , क्योकि  कसाई  मुस्लमान  जो  ठेहरा  , इससे  अच्छा  मौका  और  कब  मिलेगा  मुसलमानों  को  बदनाम  करने  का ,
लेकिन  सिर्फ  कसाई  पर  ये  इलज़ाम  लगाना  सरासर  गलत  और  अनैतिक  है , क्योकि  ये  गाये  कसाई  के  घर  में  पैदा  नहीं  होती ,
अगर  कसाई  के  घर  में  पैदा  नहीं  होती  तो  कहा  पैदा  होती  और  पाली  जाती  है?
जी  हां  ये  भी  एक  बहुत  बड़ा  सच्च  है  की  ये  जियादातर  उन्ही  लोगो  के  घर  पैदा  होती  और  पाली  जाती  है , जो  गाय  हत्या  को  पाप  और  अपराध बताते है , 
अब  सवाल  उठता है  की  ऐसे  लोगो  के  घर  से  ये  गाय  कसाई  जैसे  कुवे  में  केसे  पहुच  जाती  है , ये  लोग  कसाई  जैसे  कुवे  में  अपनी  माँ  को  क्यों  फैंक  देते  है  और  कसाई  किस  आधार  पर  गाय  को  लेता  है , ये  लोग  गाय  के  मांस  के  आधार  पर  पैसा  मांगते  है , और  कसाई  भी  मांस  के  आधार  पर  ही  पैसा  देता  है ,,,
छोटे  जानवर  का  कम  पैसा  बड़े  जानवर  का  ज्यादा  पैसा ,,,
अब  ये  बात  साबित  होती  है  की  ये  लोग  भी  कसाई  को  मांस  ही  बेचते  है , फर्क  बस  इतना  है  ये  जिंदा  बैचते  है  और  कसाई  मरा  हुवा,
अगर  सच्चाई यही है तो  फिर  अकेला  कसाई  अपराधी  क्यों ?
हकीकत  मै  अपराधी   मौत  का  कुवा  नामक  कसाई  है  या  वो  सनातन -आर्य  जो  अपनी  माँ  यानी  गाय  को  चन्द  पैसो  के  लिए  उस  मौत  के  कुवे  में  फैंक  देता  है ?
बेशक  अपराधी  कुवा  नहीं  हो  सकता,,,,,
तो फिर कुवे को सजा क्यों???
वाह  रे  मेरे  देश  के  अंधे  कानून  कभी  तो  सच्चाई  को  देख , जरा  देख  गाय  की  हत्या  का  अपराधी  कौन  है , कभी  तो  अपराधी  को  सजा  दे,,,,,,,,

Thursday, 3 November 2011

"सनातन , शुद्र और सियासत"

सनातन  धरम  में  वेदों  को  सदा  से  ही  ज्ञान  (इल्म) का  भण्डार  (जखीरा) बताया  जाता  है , और  एक  हकीकत  ये  है  कि  ज्ञान  ( इल्म) को  जितना  बाटो , जितना  लुटाओ , जितना  खर्च  करो  उतना बढ़ता  है , लेकिन  इसके  ठीक  विपरीत  (उल्टा)  सनातन-आर्यों  ने  वेदों  को  हमेशा  दूसरी  जातियों  और शुद्रो  से  छुपाया  है ,,, इतना  ही  नहीं  कहा  जाता  है  कि  अगर  शुद्र  वेदों  को  पढ़  लेते  या  कही  सुन  भी  लेते  तो  उसे  इसकी  सजा  दी जाती  थी ,,,

:- सनातन-आर्यों  कि  इस  खोखली  मानसिकता  के  ये  मुख्य  कारण  (वजह ) हो  सकते  है ,,,
 
1:- धर्म  पर  अपना  अधिकार  बनाये  रखना , शुद्रो  और  अन्य  जातियों  को  अपने  मुकाबले  समानता  न  आने  देना ,,,

2:- खुद  को  समाज  का  उच्च  वर्ग  बना  कर  शुद्रो  का  शोषण  करना !!!

3:- वेदों  में  दिए  हुए  उन  मंत्रो  को  छुपाना  जिनको  पढने  से  मरने  के  बाद  इंसान  को  स्वर्ग  का  मिलना  बताया  जाता  है !!!

4:- दुनिया  के  सभी  सुखो  पर  अपना  अधिकार  (हक ) ज़माना , और  मरने  के  बाद  स्वर्ग  को  भी  अपने  अधिकार  में  कर  लेना !!!

ये  सभी  कारण  इस्लाम  से  पहले  कि  कहानी  बयान  करते  है , इस्लाम  के  आजाने  के  बाद  एक  वजह  और  जुड़  जाती  है

5:- वेदों  में  आये  उन  श्लोको  को  छुपाना  जो  इस्लाम  कि  सच्चाई  बयान  करते  है !!!

6:- इस्लाम  कि  सच्चाई  बयान  करने  वाले  श्लोको  को  छुपाकर , मुसलमानों  कि  ताक़त  ना  बढ़ने  देने  के  लिए  शुद्रो  को  उन्ही  के  मान्यता  वाले  किसी  अन्य  धरम  कि  तरफ  मोड़ना !!!

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आइये  अब  जरा  तफसील  से  देखते  है  इन  कारणों  में  कितनी  सच्चाई  है ,,,,,

1:- धर्म  पर  अपना  अधिकार  बनाये  रखना , शुद्रो  और  अन्य  जातियों  को  अपने  मुकाबले  समानता  ना  आने  देना !!!

explain:- ये  बात  100% सच्च  कि  सनातन-आर्यों  ने  इस  धरम  पर  हमेशा  सिर्फ  और  सिर्फ  अपना  अधिकार  बनाये  रख्खा , शुद्रो  को  अछूत  बता  कर  कभी  अपने  पास  भी  नहीं  आने  दिया , यहाँ  तक  कि  अपने  मंदिरों  और  बाकी  धार्मिक  स्थानों  पर  भी  शुद्रो  के  जाने  पर  उन्हें   असामाजिक  सजा  दी , शुद्रो  को  प्रताड़ित  (सताया) किया , बाबा  साहेब  भीमराव  अम्बेडकर  के  आने  तक  यही  सिलसिला  चलता  रहा



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2:-  खुद  को  समाज  का  उच्च  वर्ग  बना  कर  शुद्रो  का  शोषण  करना !!!

explain:-इस  बात  का  इतिहास  गवाह  है  कि  सनातन-आर्यों  ने  सदा  से  ही  खुद  को  उच्च  जाती  का  और  शुद्रो  को  नीची जाती  का  घोषित  कर  रख्खा  था , हद  तो  ये  थी  कि  ये  शुद्रो  को  अछूत  कहते  और  उनके  साथ  ऐसा  व्यवहार  करते  जो  इंसानियत  को  भी  शर्मसार  करदे , इनके  इसी  बर्ताव  के  चलते  शुद्रो  का  जीवन  स्वर्ग  जैसे  इस  देश  में  रह  कर  भी  नरक  से  बदतर  बना  रहा ,



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3:-  वेदों  में  दिए  हुए  उन  मंत्रो  को  छुपाना  जिनको  पढने  से  मरने  के  बाद  इंसान  को  स्वर्ग  का  मिलना  बताया  जाता  है !!!

explain:- यजुर्वेद  के  खंड  20 में  एक  मंत्र  आया  है  जो  इस  प्रकार  है ,,,

ला इलाह हर्देह पापम,
इल्लल्लाह परम पिरम,
जा त्वम् इच्छाम स्वर्गम,
नामः जपम मुहम्मादम,

अनकही  के  नाम  से  विख्यात  इस  श्लोक  के  बारे  में  कहा  जाता  है  कि  इसे  पढकर  मरने  वाले  इंसान  को  स्वर्ग  कि  प्राप्ति  होती  है , अब  मै  उसी  मसले  पर  आता  हु  कि  अगर  इससे  किसी  को  सुवर्ग  मिलता  है  तो  फिर  इसे  छुपाने  कि  किया  ज़रूरत  है , इस  श्लोक  को  छुपाने  का  ये  एक  ऐसा  कारण  है  जो  इंसानी  फितरत  और  धार्मिक  आस्था  से  जुदा  है , सनातन -आर्यों  ने  शुद्रो  को  इस  दुनिया  में  कभी  अपनी  बराबरी  का  नहीं  बन्ने  दिया   उनकी  ज़िन्दगी  को  हमेशा  नरक  से  बदतर  बनाये  रख्खा , शुद्रो  से  इस  हद  तक  नफरत  करने  वाले  लोग  शायद  ये  नहीं  चाहते  थे  कि  मरने  के  बाद  यही  शुद्र  इनके  सामान  स्वर्ग  के  भागीदार  बन  जाए ,,,



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4:-  दुनिया  के  सभी  सुखो  पर  अपना  अधिकार  (हक) ज़माना , और  मरने  के  बाद  स्वर्ग  को  भी  अपने  अधिकार  में  कर  लेना !!!

explain:-  दुनिया  में  तो  इन्होने  खुदको  सर्वोच्च  बताकर  समस्त  सुखो  पर  अपना  अधिकार  जमा  ही  रख्खा  था  , इसके  आगे  इनकी  मंशा  मरने  के  बाद  सुवर्ग  पर  भी  एकाधिकार  करने  कि  रही , इसलिए  शुद्रो  के  वेदों  को  पढने , यहाँ  तक  कि  सुनने  पर  भी  रोक  लगाई  गई , इसके  चलते  अगर  कोई  शुद्र  वेदों  को  पढ़  या  कही  सुन  भी  लेता  तो  उसे  सजा  दी  जाती ,,,  अनकही  के  नाम  से  विख्यात  इस  श्लोक  के  बारे  में  कहा  जाता  है  कि  इसे  पढकर  मरने  वाला  इंसान  सीधा  स्वर्ग  जाता  है , अब  मै  यहाँ  फिर  वही  बात  कहना  चाहुगा  हु  कि  अगर  इससे  किसी  को  स्वर्ग  मिलता  है  तो  फिर  इसे  छुपाने  कि  किया  ज़रूरत  है , क्योकि  सनातन-आर्यों  ने  शुद्रो  को  इस  दुनिया  में  कभी  अपनी  बराबरी  का  नहीं  बन्ने  दिया  उनकी  ज़िन्दगी  को  हमेशा  नरक  से  बदतर  बनाये  रख्खा , इसलिए  शुद्रो  से  इस  हद  तक  नफरत  करने  वाले  लोग  शायद  ये  नहीं  चाहते  थे  कि  मरने  के  बाद  यही  शुद्र  इनके  सामान  स्वर्ग  के  भागीदार  बन  जाए ,,,



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5:- वेदों  में  आये  उन  श्लोको  को  छुपाना  जो  इस्लाम  कि  सच्चाई  बयान  करते  है !!!

explain:- यजुर्वेद  के  खंड  20 में  आये   अनकही  कहे  जाने  वाले  इस  श्लोक  को  पढने  से  पता  चलता  है  कि  ये  इस्लाम  के  कलमे  का  पुराना  रूप  है  और  ये  इस्लाम  कि  सच्चाई  बयान  करता  है , ये  देखिये ,,,

ला इलाह हर्देह पापम,
इल्लल्लाह परम पिरम,
जा त्वम् इच्छाम स्वर्गम,
नामः जपम मुहम्मादम,

इस  प्रकार  हम  कह  सकते  है  कि  वेदों  में  भी  ऐसे  सबूत  मौजूद  है  जो  इस्लाम  कि  सच्चाई  को  बयान  करते  है ,  इन  सबूतों  को  देख  कर  समस्त  शुद्र  जातीया  मुसलमान  हो  सकती  थी , और  ये  सब  इन्हें  गवारा  नहीं  था  बस  इसी  जलन  में  इस्लाम  के  फैलने  के  बावजूद  भी  इन्होने  वेदों  को  शुद्रो  से  बचाया ,,,



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6:- इस्लाम  कि  सच्चाई  बयान  करने  वाले  श्लोको  को  छुपाकर , मुसलमानों  कि  ताक़त  ना  बढ़ने  देने  के  लिए  शुद्रो  को  उन्ही  के  मान्यता  वाले  किसी  अन्य  धरम  कि  तरफ  मोड़ना !!!

explain:- बाबा  साहेब  भीमराव  अम्बेडकर  के  उदय  के  बाद  तमाम  शुद्र  बाबा  साहेब  के  समर्थक और  आज्ञाकारी   बन  गए , बाबा  साहेब  ये  अच्छी  तरह  जान  चुके  थे  कि  शुद्र  जब  तक  शुद्र  बने  रहेगे  उनका  उत्थान  नहीं  हो  सकता , शुद्रो  से  शुद्र  और  अछूत  नाम  का  कलंक  हटाने  के  लिए  बाबा  साहेब  ने  एक  नए  धरम  कि  खोज  शुरू  करदी  इधर  सनातन -आर्यों  कि  धरकने  बढ़  गयी  क्योकि  लोकतंत्र  में  अपना  राज  कायम  करने  के  लिए  और  मुसलमानों  का  सत्ता  से  सफाया  करने  के  लिए  उन्हें  शुद्रो  कि  घोर  आवश्यकता  थी , उन्होंने  उनसे  हमदर्दी  जताई  भाईचारा  दिखाया , गले  भी  लगाया  लेकिन  बाबा  साहेब  जैसे  विद्वान्  से  उनकी  मानसिकता  कैसे  छुप  सकती  थी ,  वे  अपने  लिए  नए  धरम  कि  खोज  पर  अडिग  रहे  उनके  सामने  कई  विकल्प  थे  जिनमे  से  सबसे  बड़े  विकल्प  इस्लाम  और  
इसाई  धरम  थे  लेकिन  इन  दोनों  ही धर्मो  में  से  किसी  को  अपनाने  पर  शुद्र  सनातन-आर्यों  कि  विचारधारा  से  अलग  हो  जाते , ऐसा  होने  पर  सनातन-आर्यों  को  उनका  राजनैतिक  लाभ  भी  नहीं  मिलसकता  था , और  अगर  by luck शुद्र  मुस्लमान  होजाते  तो  इनका  राज  करने  का  सपना  सपना  ही  रह  जाता , इसलिए  बाबा  साहेब  से  इस्लाम  और  इसाई  धरम  कि  बुराइया  ही  कि  गयी , अब  यहाँ  एक  मसला  और  है  कि  अगर  सनातन-आर्य  धरम  एक  सम्पूर्ण  धरम  है  तो  उसकी  अच्छाईया बताकर  बाबा  साहेब  और  तमाम  शुद्रो  को  सनातन-आर्य  धरम  में  कियो  नहीं  लेलिया  गया  बाबा  साहेब  और  तमाम  शुद्रो  को  पंडित  या  ब्रह्मण  कियो  नहीं  बना  लिया  गया ,,,
सनातन-आर्यों  कि  इस  मानसिकता  को  जान्ने  के  लिए  मै  बताना  चाहुगा  कि  सनातन-आर्यों  ने  बाबा  साहेब  को  सनातन  धरम  को  अपनाने  या  वेदों  को  अपनाने  का  प्रस्ताव  नहीं  दिया , इसकी  दो  वजह  हो  सकती  है


1- उनकी  मानसिकता  अब  भी  वही  थी  और  वे  अपने  धरम  को  अछूतों  से  बचाना  चाहते  थे,


2- वेदों  में  इस्लाम  कि  सच्चाई  के  सबूत  मौजूद  है  कही  शुद्र  उन्हें  देख  कर  मुसलमान  ना  होजाए ,


क्योकि  लोकतंत्र  में  राजशाही  ताकत  पे  नहीं  जनसँख्या  पर  आधारित  है , इसी  लिए  बाबा  साहेब  को  उन्ही  कि  विचार-धारा  वाले  धरम  कि  और  मोड़ा  गया  ताकि  सनातन-आर्य  बहुसंख्यक  हो  जाए  और  उन्हें  ही  हमेशा   सत्ता  प्राप्त  हो ,,,,,,,, 

Thursday, 25 August 2011

!!!Tauheed se goonje sada takbeer ka naara!!!


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Tauheed se goonje sada takbeer ka naara!!!
Ya RAB tu de rasool ki ummat ko sahaara!!!
Sunnat pe nabi ki chale ta umar kadam yu""
Hargiz na dag-magaaye ye imaan hamaara!!!

Ya RAB tu de rasool ki*********************

Hai khoon ki holi kahi saya hai julam ka""
Ummat pe muhammad ki hai tufaan sitam ka""
Kasti fasi bhawar me dikhaade tu kinaara!!!

Ya RAB tu de rasool ki*********************

Kuchh log hai is kaum me dehshat ke pujari""
ShaitaN ye bane hai meri millat ki beemari""
Inko bhi sikhaade tuhi ISLAM ye piyaara!!!

Ya RAB tu de rasool ki*********************

Tohmat hai tashaddud ki islam ke upar""
Aman ke upar teri pehchaan ke upar""
Jhoota hai ye mitade tu iljaam hi saara!!!

Ya RAB tu de rasool ki*********************

Har sakhs ko sunnat pe nabi ki tu chalade""
Is kaum ko tu aman ki pehchaan banade""
Karde buland kaum-e-musalma ka sitara!!!

Ya RAB tu de rasool ki*********************
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Naseem Nigar Hind

Tuesday, 16 August 2011

!!! Padh ved koi ya puraan koi !!!


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Padh ved koi ya puraan koi!!!
Hai sabme ye ankit gyaan koi!!!

Jiski rachna brahammad samast""
Hai ek vidhaata maan koi!!!

Uski rachna sab dev asur""
Suraj ho nadi ya insaan koi!!!

Hai doot fakat avtaar nabi""
Na inhe vidhata jaan koi!!!

Jo raah dikhaye khuda nahi""
Paigambar hai pehchaan koi!!!

Antar ishwar insaan me rakh""
Mat ban itna naadaan koi!!!

Jo satya likha hai vedo me""
Us satya ka kar gungaan koi!!!

Na chupa kabhi tu satya kahi""
Is satya ka kar samman koi!!!

Ye ankahi kehlai chhup kar""
Jab choote kisi ka piraan koi!!!

Hai maut saamne kiya haasil""
Kare tauba gar shaitaan koi!!!

Ho khuda vo raaji gar jeete-ji""
Rakhkhe is par imaan koi!!!

Ho rutba uska AFROZ buland""
Gar kare qubool imaan koi!!!
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पढ़  वेद  कोई  या  पुराण  कोई!!!
है  सबमे  ये  अंकित  ज्ञान  कोई!!!

जिसकी  रचना  ब्रह्मांड  समस्त""
है  एक  विधाता  मान  कोई!!!

उसकी  रचना  सब  देव  असुर""
सूरज  हो  नदी  या  इंसान  कोई!!!

है  दूत  फकत  अवतार  नबी""
ना  इन्हें  विधाता  जान  कोई!!!

जो  राह  दिखाए  खुदा  नहीं""
पैगम्बर  है  पहचान  कोई!!!

अंतर  इश्वर  इंसान  में  रख""
मत  बन  इतना  नादाँ  कोई!!!

जो  सत्य  लिखा  है  वेदों  में""
उस  सत्य  का  कर  गुणगान  कोई!!!

ना  छुपा  कभी  तू  सत्य  कही""
इस  सत्य  का  कर  सम्मान  कोई!!!

ये  अनकही  कहलाई  छुप  कर""
जब  छूटे किसी  का  प्राण  कोई!!!

है  मौत  सामने  किया  हासिल""
करे  तौबा  गर  शैतान  कोई!!!

हो  खुदा  वो  राजी  गर  जीते-जी""
रख्खे  इस  पर  ईमान  कोई!!!

हो  रुतबा  उसका  अफरोज  बुलंद""
गर  करे  कुबूल  ईमान  कोई!!!
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Naseem Nigar Hind